नई दिल्ली: देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए कांग्रेस के बिना ही इम्पीचमेंट यानी महाअभियोग प्रस्ताव लाने की दिशा में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस काफी आगे बढ़ चुकी है। दिल्ली के संसदीय सूत्रों का दावा है कि लोकसभा और राज्यसभा मिलाकर अब तक कम-से-कम 106 विपक्षी सांसद सीईसी के इम्पीचमेंट प्रस्ताव के समर्थन में हस्ताक्षर करने को तैयार हो चुके हैं। हालांकि इस सूची में अब तक किसी भी कांग्रेस सांसद का नाम शामिल नहीं है।
संसदीय नियमों के अनुसार किसी संवैधानिक प्राधिकरण के प्रमुख को हटाने के लिए संसद में प्रस्ताव पेश करने हेतु कम-से-कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं। तृणमूल सूत्रों का दावा है कि यह ‘मैजिक फिगर’ उनके पास पहले ही पहुंच चुका है। संसद के चालू बजट सत्र का पहला चरण शुक्रवार को समाप्त होगा। तृणमूल का कहना है कि उससे पहले दोनों सदनों से विपक्ष के कुछ और सांसद इस मुद्दे पर उनका समर्थन करेंगे।
इससे पहले मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी कई बार ज्ञानेश कुमार पर निशाना साध चुके हैं। इसलिए उनके खिलाफ इम्पीचमेंट प्रस्ताव पर कांग्रेस के समर्थन की अटकलें लगाई जा रही थीं। तृणमूल द्वारा प्रस्ताव लाए जाने के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने कहा था कि वे इस विषय पर विचार कर रहे हैं। लेकिन मंगलवार तक कांग्रेस हाईकमान से इस पर हरी झंडी नहीं मिली है। तृणमूल कांग्रेस का इंतजार करने को तैयार नहीं है।
मंगलवार को तृणमूल के एक वरिष्ठ सांसद ने कहा, “यह सोचना गलत है कि कांग्रेस के बिना तृणमूल आगे नहीं बढ़ सकती। कांग्रेस को छोड़कर भी हमारे पास 106 सांसदों का समर्थन है। तृणमूल जनता के हित में अपनी लड़ाई जारी रखेगी।”
इम्पीचमेंट प्रस्ताव पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए लोकसभा में तृणमूल के नेता अभिषेक बनर्जी ने कहा, “हमने शुरुआत में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इम्पीचमेंट प्रस्ताव नहीं लाया था। हम तीन महीने पहले भी ला सकते थे। कांग्रेस ने प्रस्ताव लाने की बात कही थी। हमने हर पहलू पर विचार किया। हम आयोग गए, बैठकें कीं, मुख्यमंत्री ने खुद छह पत्र लिखे। पिछले तीन महीनों में हमारे प्रतिनिधिमंडल ने कोलकाता और दिल्ली में 100–150 पत्र जमा किए, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। अब आखिरी विकल्प इम्पीचमेंट है।”
पिछले सप्ताह दिल्ली दौरे पर जब तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ संभावित इम्पीचमेंट प्रस्ताव पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा था कि इस विषय पर विपक्षी दलों से चर्चा की जा सकती है। उन्होंने यह भी टिप्पणी की थी कि भले ही विपक्ष के पास आवश्यक संख्या न हो, उनका कदम “रिकॉर्ड में दर्ज रहेगा।” इसके बाद तृणमूल ने समान विचारधारा वाले विपक्षी दलों से बातचीत शुरू की। सूत्रों के अनुसार, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी और द्रविड़ मुनेत्र कषगम जैसे ‘इंडिया’ गठबंधन के कई सहयोगी दल तृणमूल के पक्ष में हैं। हालांकि कांग्रेस की प्रतिक्रिया न मिलने से तृणमूल खेमे में नाराजगी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग मानता है कि पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस ‘अकेले चलो’ की नीति अपना रही है। यहां तक कि लोकसभा स्पीकर के खिलाफ ‘रिमूवल मोशन’ लाने के मामले में भी कांग्रेस ने एकतरफा निर्णय लिया था। इसलिए ज्ञानेश कुमार के इम्पीचमेंट प्रस्ताव पर भी तृणमूल ने कांग्रेस से समान दूरी बनाए रखने का फैसला किया है।
हालांकि भारतीय जनता पार्टी इस खींचतान को महत्व देने को तैयार नहीं है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कहा, “कांग्रेस ही तृणमूल है और तृणमूल ही कांग्रेस। तृणमूल भ्रमित और हताश है। उन्हें पता है कि उनका पतन तय है। गंगोत्री से गंगासागर तक भाजपा की सरकार बनेगी।”