नई दिल्ली: लोकसभा में 2026-27 के केंद्रीय बजट पर बुधवार को जोरदार बहस देखने को मिली। चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने बजट दस्तावेज पढ़े बिना ही भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर गलत आरोप लगाए। उनकी आपत्तियों में कोई दम नहीं है। इधर, बजट पर बहस के दौरान राहुल गांधी ने सरकार पर राष्ट्रीय हितों से समझौता करने का आरोप लगाया, जबकि सीतारमण ने पलटवार करते हुए कांग्रेस पर ही किसानों और गरीबों के हितों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया।
बजट का आकार क्या कहता है?
सरकार ने 2026-27 के लिए कुल 53.47 लाख करोड़ रुपये के व्यय का अनुमान पेश किया है जो पिछले साल से 7.7% अधिक है। पूंजीगत व्यय 12.2 लाख करोड़ रुपये रखा गया है जो जीडीपी का 3.1% है। वित्त मंत्री ने बताया कि वैश्विक अनिश्चितताओं से निपटने के लिए 50,000 करोड़ रुपये का आर्थिक स्थिरीकरण कोष और 9,800 करोड़ रुपये का टेक सिक्योरिटी फंड बनाया गया है।
भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते पर बवाल
बहस का सबसे बड़ा मुद्दा भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता रहा। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस समझौते में डिजिटल व्यापार नियमों पर भारत ने नियंत्रण छोड़ा, डेटा लोकलाइजेशन नहीं किया और अमेरिका को मुक्त डेटा प्रवाह की अनुमति दी। सीतारमण ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बजट में डेटा सेंटर के लिए स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं और विपक्ष तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहा है।
समझौते के तहत भारत अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों-जैसे सूखे अनाज, लाल ज्वार, नट्स, फल, सोयाबीन तेल और वाइन-पर टैरिफ घटाएगा या हटाएगा। बदले में अमेरिका भारतीय उत्पादों-टेक्सटाइल, चमड़ा, प्लास्टिक, रसायन और मशीनरी-पर रेसिप्रोकल टैरिफ 25% से घटाकर 18% करेगा। इसके अलावा, भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के ऊर्जा, आईटी और अन्य उत्पाद खरीदेगा।
किसानों और गरीबों को कितना फायदा मिला?
वित्त मंत्री ने कहा कि खाद्य सुरक्षा के लिए 2.27 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी का प्रावधान है। 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज मिलता रहेगा। खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय को 4,064 करोड़ रुपये और उच्च मूल्य वाली कृषि के लिए 350 करोड़ रुपये दिए गए हैं। सीतारमण ने दावा किया कि फरवरी 2026 में अनुमानित खाद्य मुद्रास्फीति 2.4% है, जो यूपीए काल के 10-11% की तुलना में काफी कम है और आरबीआई के 4% लक्ष्य के करीब है।
रक्षा, ऊर्जा और हरित विकास पर जोर
बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 7.84 लाख करोड़ रुपये (15% वृद्धि) का प्रावधान है। नवीकरणीय ऊर्जा के लिए 329 अरब रुपये और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 1.046 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। सरकार ने महत्वपूर्ण खनिजों में आत्मनिर्भरता, परमाणु ऊर्जा विस्तार और राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन पर भी विशेष जोर दिया है। कार्बन कैप्चर परियोजनाओं के लिए 20,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
सियासी संग्राम और तीखी बहस
बहस के दौरान सीतारमण ने राहुल गांधी के भाषण में प्रयुक्त ‘जूजूत्सु’ जैसे शब्दों को लेकर उन्हें घेरा। उन्होंने यूपीए सरकार के डब्ल्यूटीओ समझौते और शर्म-अल-शेख घोषणा का भी जिक्र किया। वहीं राहुल गांधी ने ऊर्जा और वित्त के ‘हथियारीकरण’ पर सरकार पर निशाना साधा।
लोकसभा में बहस मंगलवार से जारी है। वित्त मंत्री गुरुवार को राज्यसभा में जवाब देंगी। इसमें कोई दो राय नहीं है कि 2026-27 का बजट सिर्फ आर्थिक दस्तावेज नहीं है। यह बजट अब राजनीतिक बहस का बड़ा मंच बन गया है-जहां आंकड़ों के साथ विचारधारा की भी टक्कर हो रही है। यही वजह है कि सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ गये हैं।