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‘टू इंडिया’ पर अभिषेक के बयान की क्लिपिंग्स वीर ने साझा की, एमी विनर कॉमेडियन के बारे में सांसद ने क्या कहा

अभिषेक बनर्जी के एक्स पोस्ट में फिर ‘टू इंडिया’ सिद्धांत का उल्लेख

By एलिना दत्ता, Posted by डॉ.अभिज्ञात

Feb 11, 2026 14:12 IST

नयी दिल्लीः पांच साल पहले एक ही भारत के दो रूपों की बात कहकर स्टैंड-अप कॉमेडियन तथा अभिनेता-निर्देशक वीर दास भगवा खेमे के निशाने पर आ गए थे। उनके उसी ‘दो भारत’ के विचार को नए रूप में संसद में पेश कर मंगलवार को लोकसभा में तृणमूल के नेता अभिषेक बनर्जी ने भाजपा और मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। ‘दो भारत’ सिद्धांत के जरिए मोदी सरकार की दोहरी नीति को उजागर करते समय तृणमूल सांसद ने कॉमेडियन वीर दास का नाम भी लिया। संसद की बहस में अभिषेक के बयान की वीडियो क्लिप बुधवार सुबह अपने इंस्टा पोस्ट में ‘द आउटसाइडर: ए मेमोयर फॉर मिसफिट्स’ के लेखक वीर दास ने साझा की।

अभिषेक की मंगलवार की संसदीय बहस के अंशों का उपयोग करते हुए, राजनीतिक व्यंग्य के लिए चर्चित और आलोचित वीर ने दरअसल अपने वर्ल्ड टूर की जानकारी दी। वीर की इस हास्य शैली की सराहना करते हुए तृणमूल के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने वही संदेश अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट किया। संयोग से जिस पोस्ट में अभिषेक की संसदीय बहस का जिक्र था, वह वीर के ‘साउंड्स ऑफ इंडिया’ वर्ल्ड टूर के प्रचार की रणनीति का हिस्सा था। इस कॉमेडी सीरीज का कोलकाता संस्करण 1 फरवरी को कोलकाता के धनधान्य स्टेडियम में आयोजित हुआ था। उस शो में भारतीय लोकतंत्र की ‘आइकॉनिक साउंड’ के रूप में एमी अवॉर्ड विजेता वीर ने कई बार संसद की बेंच थपथपाने की आवाज चलाई थी।

इस दिन अभिषेक के एक्स पोस्ट में भी व्यंग्य की झलक दिखी। उन्होंने लिखा, “वाह, यही तो दो भारत की खूबसूरती है-एक में ‘दो भारत’ की विविधताओं और विरोधाभासों पर बोलने के लिए एक कॉमेडियन से पूछताछ की जाती है। और दूसरे में वही विवाद एक टूर की घोषणा के लिए बेहतरीन प्रचार बन जाता है। कहना पड़ेगा, लोकतंत्र में सचमुच हास्यबोध है।” यहीं नहीं, तृणमूल सांसद ने कॉमेडी स्टार वीर दास को उनके ‘साउंड्स ऑफ इंडिया’ वर्ल्ड टूर के लिए शुभकामनाएं भी दीं।

मंगलवार को संसद में बजट चर्चा के दौरान अभिषेक का निशाना पूरी तरह मोदी सरकार पर था। उन्होंने सरकार की दोहरी नीति को विस्तार से उजागर किया। उन्होंने कहा, “मैं ऐसे भारत से आता हूं जहां कहा जाता है ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’। लेकिन वहीं सिर्फ मातृभाषा को संदेह का कारण माना जाता है। बंगाली बोलते ही बांग्लादेशी, मछली खाते ही मुगल। यहां ‘जय बंगला’ कहने या ‘आमार सोनार बांग्ला’ गाने पर घुसपैठिया करार दे दिया जाता है।” यह ‘टू इंडिया’ शब्दबंध सबसे पहले कॉमेडियन वीर दास के मुंह से सुना गया था, इसका भी उल्लेख अभिषेक ने किया।

लोकसभा में तृणमूल के नेता ने कहा, “एक युवा कॉमेडियन ने दो भारत की बात कही थी। कई लोग हंसे थे। लेकिन उन्होंने यह सिर्फ हंसी के लिए नहीं कहा था। उन्होंने दरअसल आईना दिखाया था। मैं उसी दो भारत का प्रतिनिधि हूं।”

उल्लेखनीय है कि 2021 में वॉशिंगटन के John F. Kennedy Center for the Performing Arts में ‘आई कम फ्रॉम टू इंडियाज’ नामक मोनोलॉग में वीर दास ने व्यंग्य के जरिए भारत की विरोधाभासी और वास्तविक तस्वीरें पेश की थीं। उन्होंने कहा था, “मैं ऐसे भारत से आता हूं जहां हम दिन में महिलाओं को देवी मानकर पूजते हैं और रात में उन्हीं के साथ सामूहिक बलात्कार करते हैं।” मजाकिया अंदाज में उन्होंने मोदी सरकार पर भी कटाक्ष किया था।

2021 के उस शो में वीर ने एक ओर केंद्र की मोदी सरकार की उपलब्धियों का प्रचार करने वाले समर्थकों का जिक्र किया था तो दूसरी ओर फसल का उचित मूल्य न पाने वाले किसानों की बात भी कही थी। बेरोजगारी से जूझते युवाओं और नौकरी गंवाने वाले मजदूरों का मुद्दा उठाने पर वे स्वाभाविक रूप से भगवा खेमे के निशाने पर आ गए। उन्हें भारी ट्रोलिंग और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा, फिर भी वे अपने रुख से पीछे नहीं हटे। हाल ही में अपने ‘द राइटिंग रूम’ इंस्टा पोस्ट में भी वीर ने उस प्रसंग को छुआ। उनके शो में कई बार राजनीतिक व्यंग्य उभरकर सामने आया है। इसी महीने उन्होंने अपने शो में संसद की मेज थपथपाने की आवाज को खास अंदाज में इस्तेमाल किया, जो सुनने में भले मनोरंजक लगे, लेकिन उसके भीतर सत्ताधारी दल पर तंज छिपा था।

मंगलवार को संसद में वीर दास द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्दबंध को उद्धृत करते हुए तृणमूल सांसद ने मोदी सरकार पर हमला बोला। उसी बयान की क्लिपिंग्स इंस्टा पर पोस्ट कर वीर दास ने मजाक में लिखा, “आखिरकार संसद में…?” हालांकि अभिषेक बनर्जी के एक बयान के बाद वीर ने यह भी कहा, “शायद यह भारत छोड़ने का सही समय है। इसलिए मैं अपने विदेशी टूर का कार्यक्रम घोषित कर रहा हूं।” पूरी तरह राजनीतिक मुद्दे को फिर से कॉमेडी प्रचार में बदल देने की इस ‘वीर-चित’ रणनीति की सराहना स्वयं अभिषेक बनर्जी ने भी की।

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