नई दिल्ली: सात हाई स्पीड रेल कॉरिडोर की कुल लंबाई कम से कम चार हजार किलोमीटर होगी। हाल ही में पेश बजट में जिन हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का उल्लेख किया गया है, वे हैं मुंबई–पुणे, पुणे–हैदराबाद, हैदराबाद–बेंगलुरु, हैदराबाद–चेन्नई, चेन्नई–बेंगलुरु, दिल्ली–वाराणसी और वाराणसी–सिलीगुड़ी। जापान की शिंकानसेन तकनीक का उपयोग कर भारत में जिस हाई स्पीड ट्रेन या बुलेट ट्रेन को चलाने का निर्णय लिया गया है, उसकी अधिकतम गति 320 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। इस बार के बजट में घोषणा के बाद ही इन सात रेल कॉरिडोर के निर्माण की तैयारी रेलवे ने शुरू कर दी है। इन सात नए कॉरिडोर की घोषणा से पहले ही मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर काम शुरू हो चुका है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट में एक साथ सात हाई स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा के बाद रेलवे बोर्ड के सदस्य उच्च स्तरीय बैठक में शामिल हुए। वहां सातों कॉरिडोर के प्रत्येक डीपीआर यानी डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट पर चर्चा हुई। रेलवे बोर्ड के एक सदस्य ने कहा कि किस रूट के निर्माण में संभावित कितना खर्च हो सकता है, इसका पहले आकलन होना जरूरी है। इसके बाद नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी एनएचएसआरसीएल के अधिकारियों के साथ भी बैठक हुई। यही संस्था मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के निर्माण की जिम्मेदारी संभाल रही है। सात नए कॉरिडोर का काम कितनी जल्दी शुरू किया जा सकता है और कितनी तेजी से पूरा किया जा सकता है, इसका आकलन करने के लिए एनएचएसआरसीएल को बैठक में बुलाया गया।
रेलवे बोर्ड की चर्चा का एक महत्वपूर्ण विषय यह भी था कि इस हाई स्पीड रेल परियोजना के क्रियान्वयन के लिए किस प्रकार के कर्मियों की नियुक्ति की जाएगी। बोर्ड के सदस्यों ने तकनीकी रूप से दक्ष और प्रशिक्षित कर्मियों की नियुक्ति पर जोर दिया। निर्णय लिया गया कि प्रत्येक एक्शन प्वाइंट की प्रगति की उचित स्तर पर समीक्षा कर काम आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि केंद्र सरकार को हर चरण की जानकारी मिलती रहे। साथ ही देशभर में हाई स्पीड रेल प्रणाली को मानकीकृत करने के लिए प्रत्येक परियोजना के लिए समर्पित फील्ड टीम गठित की जाएगी और जल्द से जल्द प्री कंस्ट्रक्शन गतिविधियां शुरू की जाएंगी।
केंद्र की योजना है कि 2027 तक मुंबई–अहमदाबाद कॉरिडोर के 100 किलोमीटर लंबे हिस्से में देश की पहली बुलेट ट्रेन चलाई जाए। मुंबई–अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर लगभग 508 किलोमीटर लंबा होगा। इसमें गुजरात और दादरा एवं नगर हवेली में 352 किलोमीटर तथा महाराष्ट्र में 156 किलोमीटर का हिस्सा होगा। यह कॉरिडोर साबरमती, अहमदाबाद, आनंद, वडोदरा, भरूच, सूरत, बिलिमोरा, वापी, बोइसर, विरार, ठाणे और मुंबई को जोड़ेगा।
पश्चिम बंगाल में रेल परियोजनाओं के संदर्भ में कई बार रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भूमि संबंधी समस्याओं को लेकर राज्य सरकार के असहयोग का आरोप लगाते रहे हैं लेकिन रेलवे सूत्रों के अनुसार मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना भी बार बार भूमि अधिग्रहण की समस्याओं का सामना कर रही है। इसके कारण इस परियोजना की प्रारंभिक लागत 1.08 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग दोगुनी हो गई है।