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‘वंदे मातरम’ की विज्ञप्ति में गलत बोल छपे, नया हंगामा शुरू

तृणमूल नेतृत्व का कहना है कि भगवा खेमा ने कभी रवींद्रनाथ को महत्व दिया ही नहीं।

By प्रोसेनजीत बेरा, Posted by: श्वेता सिंह

Feb 13, 2026 18:14 IST

नयी दिल्ली/कोलकाता: बंकिम चंद्र चटर्जी के ‘वंदे मातरम’ के पहले दो पैरा के बजाय अब पूरे छह पैरा को ‘राष्ट्र गान’ के तौर पर मान्यता देने का एक नोटिफिकेशन जारी किया गया है। तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के उसी निर्देश में ‘वंदे मातरम’ के गलत लिरिक्स (वाक्य) छापे गए हैं।

सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल ने गुरुवार रात X हैंडल पर नोटिफिकेशन में छपे लिरिक्स और नॉवेल ‘आनंदमठ’ के लिरिक्स को एक साथ पोस्ट किया है। उनका दावा है कि ‘आनंदमठ’ में ‘वंदे मातरम’ का तीसरा पैरा गृह मंत्रालय के नोटिफिकेशन में छपे तीसरे पैरा से मैच नहीं करता है।

तृणमूल ने X हैंडल पर लिखा है, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्लियामेंट में ऋषि बंकिम चंद्र चटर्जी को 'बंकिम दा' कहा था। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर 'वंदे मातरम' को वंदे भारत कह देते हैं। अब केंद्रीय गृह मंत्रालय के नोटिफिकेशन में ही ऋषि बंकिम चंद्र चटर्जी ने आनंदमठ में जो वंदे मातरम के बोल लिखे थे उनमें तमाम गलतियां नजर आयी हैं। गलत लिरिक्स प्रकाशित की गयी है। इसीलिए हम कहते हैं कि BJP बंग्ला भाषा की विरोधी है।’ तृणमूल के आरोपों पर गुरुवार को केंद्र की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। तृणमूल ने आगे आरोप लगाया कि मोदी सरकार का ‘जन गण मन’ से पहले राष्ट्रगान गाने का आदेश असल में रवींद्रनाथ टैगोर को नीचा दिखाने की कोशिश है। सत्ताधारी पार्टी का आरोप है कि ऐसा पश्चिम बंगाल में आने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर किया गया है।

गुरुवार को शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु ने तृणमूल भवन में कहा, ‘हम बंकिम चंद्र चटर्जी का सम्मान करते हैं। हम वंदे मातरम का सम्मान करते हैं। लेकिन BJP इसे कैसे पेश कर रही है? असल में, वे रवींद्रनाथ टैगोर के साथ अन्य लोगों का अपमान करना चाहती है। हम जानते हैं कि वे रवींद्रनाथ को पसंद ही नहीं करते क्योंकि वे सेक्युलर थे। उन्होंने पूरी जिंदगी हिंदू-मुस्लिम एकता की बात की। असल में केंद्र सरकार वंदे मातरम या बंकिम चंद्र की बड़ाई नहीं करना चाहती, वह रवींद्रनाथ को नीचा दिखाना चाहती हैं।’ तृणमूल नेतृत्व को यकीन है कि भगवा खेमा 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद फिर से बंकिम चंद्र के बारे शायद बात भी न करे।

गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर नया प्रोटोकॉल जारी किया है। इसके तहत राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के छह अंतरों वाला 3 मिनट 10 सेकंड का पूरा संस्करण कई आधिकारिक अवसरों पर बजाया या गाया जाना अब अनिवार्य कर दिया गया है।

हालांकि ब्रत्य बसु ने दावा किया कि ‘यह आदेश तीन महीने तक लागू रहेगा। इसने (केंद्र सरकार ने) बंगाल चुनाव को ध्यान में रखते हुए ये निर्देश जारी किया है। बंगाल चुनाव के बाद ममता बनर्जी फिर से मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगी। फिर आप देखियेगा कि इसे कहां गाया जाएगा। बंकिम चंद्र के बारे में (BJP) का सारा सम्मान सिर्फ दिखावा है जो बहुत जल्द गायब हो जायेगा।’

रवींद्रनाथ की सलाह पर ही 1937 में नेशनल कांग्रेस सेशन में ‘वंदे मातरम’ के पहले दो छंदों को राष्ट्रगीत के तौर पर गाने का फैसला किया गया था। तृणमूल नेतृत्व का मानना ​​है कि कवि गुरु के इस फैसले को बदलना असल में रवींद्रनाथ ठाकुर का अपमान करना है। हालांकि केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा, ‘ब्रत्य बोस एक बूढ़े आदमी की तरह बात कर रहे हैं। रवींद्रनाथ विश्व स्तर के कवि हैं। हम सभी उनका सम्मान करते हैं, वह ऐसे नक्षत्र हैं जिनका कोई अपमान नहीं कर सकता। लेकिन क्या बंकिम चंद्र का सम्मान करने से किसी और का अपमान हो जाता है? शिक्षा मंत्री बेवकूफ की तरह बात कर रहे हैं!’

तृणमूल नेतृत्व का कहना है कि भगवा खेमे को रवींद्रनाथ कभी पसंद ही नहीं थे। ब्रत्य बसु के मुताबिक, ‘RSS से लेकर हिंदुओं के सांप्रदायिक संगठन रवींद्रनाथ को पसंद नहीं करते। वे लंबे समय से रवींद्रनाथ को नीचा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। अब इस सरकारी आदेश के जरिए बंकिम को महान बनाने के नाम पर असल में रवींद्रनाथ का अपमान कर रहे हैं।’

CPM सेंट्रल कमेटी के सदस्य सुजन चक्रवर्ती ने कहा, ‘RSS-BJP से जुड़े लोग देश की आजादी की लड़ाई में नहीं थे। उनका वंदे मातरम से कोई लेना-देना नहीं है। रवींद्रनाथ ने तय किया था कि वंदे मातरम के कौन से श्लोक गाए जाएंगे। क्या अमित शाह गुरुदेव से बड़े हैं?’ तृणमूल का मानना ​​है कि मोदी सरकार ने पश्चिम बंगाल में आने वाले चुनावों के अलावा डैमेज कंट्रोल के लिए यह कदम उठाया है। राज्य की वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने आज तृणमूल भवन में कहा, “प्रधानमंत्री ने 'बंकिम दा' कहकर जो गलती की थी, BJP उससे उबरने के लिए ही यह सब कर रही है। अगर प्रधानमंत्री खुद वंदे मातरम को पूरा सुना दें, तो हम मान लेंगे कि उन्होंने कुछ किया है।”

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