🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

केंद्रीय बजट से हथकरघा उद्योग को मजबूती, कालना के बुनकर आश्वस्त

टेक्सटाइल पार्क, ‘समर्थ 2.0’ और ‘टेक्स-इको’ योजनाओं से उद्योग को रफ्तार की उम्मीद।

By देबार्घ्य भट्टाचार्य, Posted by: श्वेता सिंह

Feb 04, 2026 17:35 IST

कालना: केंद्रीय बजट 2026 में वस्त्र उद्योग के लिए बढ़े आवंटन ने हथकरघा और खादी से जुड़े कारीगरों के बीच उम्मीद की नई किरण जगाई है। केंद्रीय वित्त मंत्री ने बजट भाषण में टेक्सटाइल पार्क के निर्माण, बुनकरों व कारीगरों के कौशल विकास के लिए ‘समर्थ 2.0’ और टिकाऊ व प्रतिस्पर्धी वस्त्र उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए ‘टेक्स-इको’ जैसी पहलों की घोषणा की है। इसके साथ ही मार्केटिंग, ब्रांडिंग और क्लस्टर आधुनिकीकरण पर भी जोर दिया गया है।

कालना क्षेत्र के समुद्रगढ़, नसरतपुर, श्रीरामपुर और धात्रिग्राम लंबे समय से हथकरघा उद्योग के प्रमुख केंद्र माने जाते हैं। हालांकि, बाजार की मंदी, लागत बढ़ने और विपणन की कमी जैसी समस्याओं ने इस पारंपरिक उद्योग को प्रभावित किया है। बुनकरों का मानना है कि यदि बजट में घोषित योजनाएं जमीन पर उतरती हैं, तो इससे हथकरघा उद्योग को बड़ा सहारा मिलेगा।

मसलिन कलाकार और उद्यमी ज्योतिष देवनाथ को हाल ही में पद्मश्री सम्मान मिला है। इस समय वह फरीदाबाद के सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय ट्रेड फेयर में हिस्सा ले रहे हैं। उनका कहना है कि बुनकरों को लंबे समय से ऐसी ही ठोस पहल का इंतजार था। उनका मानना है कि सरकारी सहायता यदि सीधे बुनकरों के बैंक खातों में पहुंचे, तो इसका वास्तविक लाभ उन्हें मिल सकेगा।

नदनघाट के नसरतपुर निवासी और राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित कारीगर सुरेश बसाक बर्धमान हैंडलूम डेवलपर एंड प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड क्लस्टर के चेयरमैन भी हैं। उनका कहना है कि प्रशिक्षण से बुनकरों की दक्षता और उत्पादों की गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा। इससे बाजार में हथकरघा उत्पादों की मांग बढ़ सकती है।

वहीं, समुद्रगढ़ के सबसे बड़े हथकरघा कपड़ा हाट के संचालक सुबीर कर्मकार का मानना है कि यदि सरकार सीधे हथकरघा उत्पादों की खरीद करे और भुगतान सीधे बुनकरों के खातों में जाए, तो इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। उनके अनुसार सरकार का बुनकरों पर ध्यान देना इस पारंपरिक उद्योग के लिए सकारात्मक संकेत है।

कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट में घोषित योजनाओं से कालना सहित पूरे क्षेत्र के हथकरघा उद्योग से जुड़े लोगों को भविष्य के प्रति नई आशा दिखाई दे रही है।

Prev Article
उत्तर बंगाल के नक्सलबाड़ी की महिलाएं सैनिटरी पैड बनाकर बन रहीं आत्मनिर्भर

Articles you may like: