मेदिनीपुरः ईश्वर चंद्र विद्यासागर के आदर्शों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने वाली समर्पित शिक्षिका सुतपा बेरा ने अपने 30 वर्षों के लंबे शिक्षण करियर का समापन किया। पश्चिम मेदिनीपुर के आनंदपुर हायर सेकेंडरी स्कूल में बंगाली की शिक्षिका रहीं सुतपा बेरा शनिवार, 31 जनवरी को सेवानिवृत्त हुईं। उनकी विदाई को यादगार बनाने के लिए दूर-दूर से उनके पुराने छात्र स्कूल पहुंचे और अपनी प्रिय शिक्षिका का आभार व्यक्त किया।
मेदिनीपुर शहर की रहने वाली सुतपा बेरा के लिए छात्र ही जीवन का केंद्र रहे हैं। उन्होंने न केवल कक्षा में पढ़ाया, बल्कि अपने छात्रों को स्नेह, करुणा और अनुशासन के साथ जीवन के मूल्यों से भी परिचित कराया। स्कूल के शिक्षकों और अभिभावकों का कहना है कि सुतपा हमेशा चाहती थीं कि छात्र सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि अच्छे इंसान बनें। इसी सोच के तहत उन्होंने स्कूल परिसर में समाज सुधारक और शिक्षा के अग्रदूत ईश्वर चंद्र विद्यासागर की मूर्ति स्थापित करने की पहल की, ताकि छात्र उनके आदर्शों से प्रेरणा ले सकें और समाज के लिए उपयोगी नागरिक बन सकें।
सुतपा बेरा के इस विचार की स्कूल प्रबंधन ने सराहना की। स्कूल के कार्यवाहक प्रधानाध्यापक विश्वेश्वर मंडल और प्रबंधन समिति के अध्यक्ष शोभन गोस्वामी ने उनके योगदान के लिए धन्यवाद और आभार प्रकट किया। इस अवसर पर सुतपा ने कहा कि पंडित ईश्वर चंद्र विद्यासागर केवल बंगाली भाषा के महान विद्वान या महिला शिक्षा को एक नयी दिशा नहीं दी थी। वह सही मायने में एक आदर्श इंसान थे। उन्होंने कहा कि विद्यासागर के प्रयासों के बिना बाल विधवाओं का दुख कभी समाप्त नहीं होता। सुतपा के अनुसार समाज में लोगों को विद्यासागर के रास्ते पर चलना चाहिए।
सेवानिवृत्ति के दिन स्कूल की ओर से सुतपा बेरा के सम्मान में विदाई समारोह आयोजित किया गया। समारोह के अंत में उन्होंने स्कूल परिसर में पंडित ईश्वर चंद्र विद्यासागर की मूर्ति का अनावरण किया और इसी के साथ अपने शिक्षण जीवन को औपचारिक रूप से विराम दिया। सुतपा बेरा का यह योगदान न केवल स्कूल, बल्कि समाज के लिए भी एक प्रेरणास्रोत बनकर रहेगा।