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Tata Sons में नेतृत्व पर विराम: एन चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल पर फैसला टला

बोर्ड में मतभेद, टाटा ट्रस्ट्स की चिंताओं के बीच जून तक टली अंतिम मुहर।

By श्वेता सिंह

Feb 24, 2026 20:30 IST

मुंबईः Tata Sons ने चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल विस्तार पर फैसला फिलहाल टाल दिया है। वजह यह कि बोर्ड में एकमत नहीं बन पाया। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा बोर्ड के ऐसे अकेले सदस्य थे, जिन्होंने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर सहमति नहीं दी। सूत्रों के अनुसार, बैठक में मतभेद उभरने के बाद मुद्दे को अगली बैठक तक टाल दिया गया है। चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त हो रहा है, जब वह 65 वर्ष के हो जाएंगे। उन्हें साइरस मिस्त्री को हटाए जाने के बाद यह जिम्मेदारी दी गयी थी।

बोर्ड में मतभेद की वजह क्या थी?

सूत्रों के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने समूह की कुछ कंपनियों में हो रहे घाटे पर चिंता जताई। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस में 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जिससे उनकी भूमिका निर्णायक मानी जाती है। बताया जाता है कि नोएल टाटा ने टाटा संस की संभावित लिस्टिंग के खिलाफ राय रखी और कुछ मुद्दों पर लिखित प्रतिबद्धताओं की मांग की। यह रुख बोर्ड में चर्चा का केंद्र बना।

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कई बोर्ड सदस्यों ने चंद्रशेखरन का समर्थन करते हुए कहा कि किसी एक कंपनी के घाटे को पूरे समूह के प्रदर्शन या चेयरमैन के योगदान के आकलन का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। कुछ सदस्यों ने वोटिंग की मांग भी की, लेकिन चंद्रशेखरन ने खुद सहमति निर्माण के लिए फैसला टालने का सुझाव दिया।

टाटा ग्रुप में अब तक चंद्रशेखरन का ट्रैक रिकॉर्ड

62 वर्षीय एन चंद्रशेखरन ने 1987 में टाटा ग्रुप जॉइन किया था। वे पहले टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के सीईओ रहे और फरवरी 2017 से टाटा संस के चेयरमैन हैं। उनके नेतृत्व में समूह ने बड़े पुनर्गठन और रणनीतिक विस्तार का दौर देखा। समूह की 15 सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों का राजस्व और मुनाफा लगभग दोगुना हुआ।

उनके कार्यकाल में कुछ बड़े दांव भी लगाए गए। भारत की पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन यूनिट की योजना, घाटे में चल रही एयर इंडिया का अधिग्रहण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में टीसीएस की रणनीतिक दिशा तय करना।

टाटा समूह की विरासत

टाटा ग्रुप की स्थापना 1868 में जमशेदजी नुस्सेरवानजी टाटा ने की थी। 156 वर्षों के इतिहास में समूह का नेतृत्व अधिकतर समय टाटा परिवार के हाथों में रहा।

2012 में रतन टाटा ने नेतृत्व छोड़ा और साइरस मिस्त्री को कमान सौंपी। 2016 में बोर्डरूम विवाद के बाद मिस्त्री को हटाया गया। 2024 में रतन टाटा के निधन के बाद उनके सौतेले भाई नोएल टाटा 'टाटा ट्रस्ट्स' के चेयरमैन बने।

टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस में 66% हिस्सेदारी है, जबकि शापूरजी पालोनजी ग्रुप के पास 18% शेयर हैं। टाटा संस करीब 30 कंपनियों की निगरानी करता है, जिनमें जगुआर लैंड रोवर, टाटा मोटर्स, टीसीएस और एयर इंडिया शामिल हैं।

आगे की राह क्या होगी?

सूत्रों के मुताबिक, यह मामला अब जून में होने वाली अगली बोर्ड बैठक तक टल गया है। आधिकारिक बयान अभी तक जारी नहीं हुआ है, लेकिन चंद्रशेखरन ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने स्वयं विस्तार पर चर्चा टालने की सिफारिश की है। वजह ये कि टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच पूर्ण सहमति सुनिश्चित की जा सके।

फिलहाल समूह के संचालन या रणनीति में किसी बदलाव के संकेत नहीं हैं। हालांकि यह घटनाक्रम बताता है कि टाटा समूह के भीतर नेतृत्व, स्वामित्व और रणनीतिक दिशा को लेकर संवाद का एक नया चरण शुरू हो चुका है।

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