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एक अप्रैल से क्रेडिट कार्ड में होने वाले हैं 5 बड़े बदलाव, कार्डहोल्डर्स इन बातों का रखें ध्यान..

कार्डहोल्डर्स को सलाह दी जाती है कि वे बदले हुए टर्म्स एंड कंडीशंस को ध्यान से देखें।

By श्वेता सिंह

Feb 23, 2026 13:34 IST

कोलकाताः नये फाइनेंशियल ईयर एक अप्रैल से शुरू हो रहा है। इसके साथ ही, कई बैंक क्रेडिट कार्ड पॉलिसी में जरूरी बदलाव कर सकते हैं। ये बदलाव रिवॉर्ड पॉइंट्स, फीस, इंटरेस्ट रेट्स और खर्च करने के अलग-अलग फायदों पर असर डाल सकते हैं। इसलिए कार्डहोल्डर्स को सलाह दी जाती है कि वे बदले हुए टर्म्स एंड कंडीशंस को ध्यान से देखें।

1. रिवॉर्ड पॉइंट स्ट्रक्चर में बदलाव:

बैंक रिवॉर्ड पॉइंट्स कमाने और रिडीम करने के नियम बदल सकते हैं। रेंट पेमेंट, वॉलेट लोड और यूटिलिटी बिल जैसे एरिया में रिवॉर्ड कम हो सकते हैं। मंथली रिवॉर्ड पॉइंट्स पर एक लिमिट हो सकती है। रिडीम करते समय पॉइंट्स की वैल्यू भी बदल सकती है। इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ सकता है जो ट्रैवल या कैशबैक के लिए रिवॉर्ड पॉइंट्स पर निर्भर रहते हैं।

2. कुछ ट्रांजैक्शन पर ज्यादा फीस:

कुछ बैंक कुछ ट्रांजैक्शन पर नई फीस लगा सकते हैं या पुरानी फीस बढ़ा सकते हैं। क्रेडिट कार्ड रेंटल पेमेंट, EMI कन्वर्जन, बिलों का लेट पेमेंट और फ्यूल सरचार्ज जैसी सुविधाएं बदल सकती हैं। इस बदलाव का मकसद ज्यादा रिस्क वाले या कम फायदे वाले ट्रांजैक्शन को कम करना है।

3. मिनिमम ड्यू कैलकुलेशन के नियमों में बदलाव:

मिनिमम ड्यू कैलकुलेट करने के तरीके में भी बदलाव हो सकते हैं। पहले से ज्यादा मिनिमम डिपॉजिट की जरूरत हो सकती है। पार्शियल पेमेंट के मामले में इंटरेस्ट कैलकुलेशन ज्यादा साफ तौर पर दिखाया जा सकता है। इसका मकसद क्रेडिट के जिम्मेदारी से इस्तेमाल को बढ़ावा देना और लंबे समय के कर्ज का बोझ कम करना है।

4. एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस में नई शर्तें:

फ़्री एयरपोर्ट लाउंज की सुविधा अब खास खर्च की शर्तों से जुड़ी हो सकती है। हर तिमाही में एक तय रकम खर्च करनी पड़ सकती है। यह सुविधा सिर्फ़ कुछ खास कार्ड वेरिएंट पर ही मिल सकती है। अगर तय खर्च लिमिट पूरी नहीं होती है, तो फ़्री लाउंज की सुविधा बंद की जा सकती है।

5. इंटरेस्ट रेट और पेनल्टी में बदलाव:

सालाना परसेंटेज रेट (APR) और पेनल्टी की रकम में भी बदलाव किया जा सकता है। इंटरेस्ट रेट कस्टमर के क्रेडिट बिहेवियर, रिस्क प्रोफाइल और मार्केट की स्थितियों के आधार पर तय किया जा सकता है। अगर आप अपने बिल रेगुलर नहीं भरते हैं या आपका क्रेडिट स्कोर कम है, तो आपको ज्यादा इंटरेस्ट देना पड़ सकता है।

कार्ड होल्डर्स को क्या करना चाहिए

अपने बैंक का ऑफिशियल मैसेज चेक करें। नए टर्म्स एंड कंडीशंस ध्यान से पढ़ें। अपने खर्च को इस तरह से प्लान करें कि बेनिफिट्स मिलते रहें। फालतू एरियर जमा न होने दें। 1 अप्रैल से पहले इन बदलावों को समझना जरूरी है। इससे आपको अचानक लगने वाले चार्ज या बेनिफिट्स के नुकसान के रिस्क से बचने में मदद मिलेगी।

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