नयी दिल्लीः गीग अर्थव्यवस्था में बढ़ती अस्थिरता और कमीशन आधारित मॉडल पर उठते सवालों के बीच केंद्र सरकार ने सहकारिता ढांचे के जरिये वैकल्पिक मॉडल पेश करने की पहल की है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने सोमवार को कहा कि हाल ही में शुरू की गई भारत टैक्सी (Bharat Taxi) अपने प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले चालकों के लिए प्रति किलोमीटर न्यूनतम बेस रेट सुनिश्चित करेगी-ऐसा प्रावधान जो मौजूदा निजी एग्रीगेटर कंपनियों में नहीं है।
दिल्ली-एनसीआर और गुजरात के कैब एवं ऑटो चालकों के साथ टाउन हॉल संवाद में शाह ने दावा किया कि मौजूदा कंपनियों ने न्यूनतम दर तय करने से परहेज किया है। उनके अनुसार, भारत टैक्सी का मॉडल यह सुनिश्चित करेगा कि चालक की आय का एक आधार सुरक्षित रहे और अतिरिक्त कमाई भी उसी के पास लौटे।
सह-स्वामित्व बनाम कमीशन मॉडल
भारत टैक्सी का ढांचा पारंपरिक निजी एग्रीगेटर मॉडल से अलग है। जहां ओला, उबर जैसे प्लेटफॉर्म 25-30% तक कमीशन काटते हैं, वहीं यह सहकारी मंच फिलहाल कोई कमीशन नहीं ले रहा। प्रस्तावित ढांचे के तहत कुल मुनाफे का 80% चालकों को उनके द्वारा तय किलोमीटर के अनुपात में लौटाया जाएगा, जबकि 20% सहकारी पूंजी के रूप में रखा जाएगा।
चालक 500 रुपये का शेयर खरीदकर सह-मालिक बन सकते हैं और सदस्य संख्या बढ़ने पर निदेशक मंडल में उनके प्रतिनिधियों के लिए सीटें आरक्षित होंगी। यह संरचना लाभ वितरण के साथ निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी का भी दावा करती है।
‘अमूल मॉडल’ की तर्ज पर विस्तार
शाह ने Amul का उदाहरण देते हुए सहकारिता आधारित बड़े पैमाने के व्यवसाय की संभावना पर जोर दिया। उनका कहना था कि जिस तरह अमूल ने उत्पादकों को लाभ का बड़ा हिस्सा लौटाने का मॉडल स्थापित किया। ठीक उसी तरह भारत टैक्सी मोबिलिटी क्षेत्र में सहकारी विकल्प बनने की कोशिश है।
प्लेटफॉर्म फिलहाल दिल्ली-एनसीआर और राजकोट में संचालित है। लक्ष्य दो वर्षों में 15 करोड़ चालकों को जोड़ने और तीन वर्षों में हर नगर निगम शहर तक पहुंचने का है। हालांकि, लाभांश आधारित मॉडल को पूरी तरह सक्रिय होने में तीन वर्ष तक का समय लग सकता है।
सामाजिक आयाम: महिला सुरक्षा और गरिमा
ऐप में प्रस्तावित ‘Saarathi Didi’ फीचर के तहत अकेली यात्रा करने वाली महिलाएं महिला चालकों को प्राथमिकता दे सकेंगी। यह पहल महिला चालकों की भागीदारी बढ़ाने और सुरक्षा से जुड़े भरोसे को मजबूत करने की दिशा में देखी जा रही है।
शाह ने चालकों को ‘ड्राइवर’ के बजाय ‘सारथी’ कहने का आग्रह करते हुए पेशे की गरिमा पर भी जोर दिया।
संस्थागत समर्थन और सुरक्षा कवच
नए वाहन खरीदने के लिए सहकारी बैंकों के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराने की बात कही गई है, जिसमें वाहन को ही मॉर्गेज के रूप में रखा जा सकेगा। बीमा सुविधा IFFCO Tokio के साथ न्यूनतम प्रीमियम पर उपलब्ध कराने की योजना है। साथ ही, ऑनलाइन, कॉल सेंटर और भौतिक माध्यमों से तीन-स्तरीय शिकायत निवारण प्रणाली लागू की जाएगी। नीतिगत बदलावों की सूचना कम से कम एक सप्ताह पहले दी जाएगी।
भारत टैक्सी को Ola, Uber और Rapido जैसे स्थापित प्लेटफॉर्म के लिए चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, इस पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या यह न्यूनतम बेस रेट और लाभ वितरण के वादे को टिकाऊ व्यावसायिक मॉडल में बदल पाती है। क्या बड़े पैमाने पर ड्राइवरों का विश्वास अर्जित कर पाती है।
फिलहाल, यह पहल गिग अर्थव्यवस्था में सहकारिता आधारित हस्तक्षेप का एक महत्वपूर्ण प्रयोग मानी जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि सुरक्षा और भागीदारी आधारित स्वामित्व के जरिये वैकल्पिक ढांचा प्रस्तुत की जायेगी।