🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

ट्रंप टैरिफ वापसी के बाद नई दिल्ली सख्त मंथन में

व्हाइट हाउस में पत्रकारों के सामने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्वयं डॉन (ट्रंप) ने दो भिन्न प्रकार के दावे प्रस्तुत किए।

By सुदीप्त तरफदार, Posted by : राखी मल्लिक

Feb 22, 2026 12:53 IST

नई दिल्ली : डोनाल्ड ट्रंप के ‘लिबरेशन-डे’ टैरिफ रद्द हो जाने के बाद भी नई दिल्ली गणितीय उलझन में फंसी हुई है। आने वाले दिनों में कितनी दर से शुल्क देना होगा, इसे लेकर बाजार में अलग-अलग पक्षों की अलग-अलग राय तैर रही है। एक पक्ष का दावा है कि कोर्ट का फैसला जानने के बाद व्हाइट हाउस में पत्रकारों के सामने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए खुद ट्रंप ने दो तरह के दावे किए।

पहला, शुक्रवार को उन्होंने सीधे घोषणा की कि 1974 के व्यापार कानून की धारा 122 के तहत वह पूरी दुनिया पर 10% की दर से आयात शुल्क लगा रहे हैं, जो वर्तमान में लागू शुल्क के ऊपर अतिरिक्त रूप से शुक्रवार से ही प्रभावी होगा। इस हिसाब से भारत पर ‘लिबरेशन-डे’ टैरिफ लागू होने से पहले जो 3.5% शुल्क प्रभावी था, उसे जोड़कर नया आयात शुल्क 13.5% होना चाहिए। लेकिन शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर दिए गए एक संदेश में ट्रंप ने कहा कि स्थिति की समीक्षा के बाद वह नए लगाए गए शुल्क को 10% से बढ़ाकर तत्काल 15% कर रहे हैं। इससे गणित और जटिल सीढ़ीदार हिसाब में बदल रहा है। इस हिसाब से भारत पर प्रभावी शुल्क 15 + 3.5% यानी 18.5% हो सकता है।

लेकिन इस सरल गणित पर कल खुद पोटस (POTUS) ने ही आपत्ति जता दी। एक पत्रकार वार्ता में सवाल के जवाब में उन्होंने यह भी दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के परिप्रेक्ष्य में भारत के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते की शर्तों में कोई बदलाव नहीं हो रहा है। भारत समझौता ज्ञापन के मसौदे के अनुसार ही आगे 18% शुल्क देगा, लेकिन अमेरिकी कंपनियां भारत के बाजार में बिना शुल्क के अपने उत्पाद बेच सकेंगी। यदि प्रस्तावित समझौते पर अगले मार्च में हस्ताक्षर के समय भी यही स्थिति बनी रहती है, तो 18% की दर से शुल्क बनाए रखने को नई दिल्ली कितना स्वीकार करेगी, इस पर भी सवाल है। अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से ट्रंप-टैरिफ का बोझ हट जाने के बाद नई दिल्ली की ओर से शुल्क दर कम करने को लेकर मोलभाव होना लगभग तय माना जा रहा है। इसलिए अभी यह कहना मुश्किल है कि भारत पर प्रभावी शुल्क दर आखिर कितनी होगी।

तीसरा मत भी सामने है। उनका कहना है कि वॉशिंगटन ने अपने बयान में स्पष्ट कहा है कि नई दिल्ली पर फिलहाल प्रभावी शुल्क दर 10% होगी। तो फिर चिंता किस बात की? इसके जवाब में व्यापार जगत का तर्क है कि ‘लिबरेशन-डे’ टैरिफ लागू होने से पहले जहां औसतन 3.5% शुल्क देना पड़ता था, वहां 10% भी काफी ज्यादा है। इसलिए शुल्क कम कराने के लिए केंद्र सरकार को तुरंत प्रयास शुरू करना चाहिए।

इससे भारत की स्थिति एक अजीब त्रिशंकु अवस्था में फंस गई है। आंकड़े बताते हैं कि 2025 में ट्रंप के व्हाइट हाउस में आने से पहले कई दशकों तक अमेरिका में भारतीय वस्तुओं पर औसत आयात शुल्क 2.8% था। जबकि भारत में अमेरिकी वस्तुओं पर यह लगभग तीन गुना, यानी 7.7% था। कृषि क्षेत्र में यह अंतर और भी स्पष्ट था। भारतीय कृषि उत्पाद जहां औसतन 7.7% शुल्क देकर अमेरिकी बाजार में प्रवेश करते थे, वहीं अमेरिकी कृषि निर्यात को भारत में 37.7% का ऊंचा ‘दाम’ चुकाना पड़ता था।

औद्योगिक उत्पादों के मामले में भी शुल्क का बोझ नई दिल्ली के पक्ष में एकतरफा था। वॉशिंगटन में भारतीय औद्योगिक वस्तुओं पर मात्र 2.6% शुल्क लगता था, जबकि भारत आने वाले अमेरिकी उत्पादों पर 5.9% शुल्क लगाया जाता था। दूसरी बार सत्ता में आने के बाद ट्रंप ने इन असमानताओं को खत्म करने के साथ-साथ 2030 तक भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार को 45 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य भी घोषित किया था।

वर्तमान परिस्थिति कुछ ऐसी है जैसे गले में फंसी कांटा निकाल देने के बाद भी कुछ समय तक उस जगह चुभन बनी रहती है। वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था की स्थिति भी कुछ वैसी ही है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। ऐसे में राजनीति के अखाड़े में अंततः आखिरी जीत किसकी होती है—ट्रंप की या नरेंद्र मोदी की, इस पर सबकी नजर टिकी हुई है।

Prev Article
PhonePe का बड़ा अपडेट: AI से अब बोले या लिखें, काम हो जाएगा
Next Article
भारतीय बैंकिंग और रिटेल सेक्टर में एआई का तेजी से विस्तार: सर्विसनाउ

Articles you may like: