वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने सुप्रीम कोर्ट में हारने के बावजूद वैश्विक व्यापार में हलचल मचा दी है। शुक्रवार सुबह कोर्ट के फैसले के कुछ ही घंटों के भीतर उन्होंने घोषणा की कि दुनिया के सभी देशों पर पहले से लागू टैरिफ के अलावा 10% का नया टैरिफ लागू किया जा रहा है।
व्हाइट हाउस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बदले की कार्रवाई करने वाले टैरिफ लगाने की शक्ति नहीं दी। हालांकि संविधान के आर्टिकल 122 के तहत उन्हें 150 दिनों के लिए सभी देशों पर एकतरफा 15% टैरिफ लगाने का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने बताया कि फिलहाल यह 10% की दर से लागू किया जा रहा है, जबकि ऑटो और कुछ अन्य मामलों में यह दर 30% तक बढ़ सकती है।
ट्रंप ने नई दिल्ली के साथ हुए ट्रेड समझौते पर भी कहा कि इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। उनका कहना था कि समझौता पहले से तय शेड्यूल के अनुसार ही चलेगा, जिससे भारत को थोड़ी निराशा जरूर हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
पिछले साल 2 अप्रैल को ट्रंप ने “लिबरेशन डे” टैरिफ लागू किया था। तब से वैश्विक व्यापार और डिप्लोमेसी में लगातार अस्थिरता देखी गई। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 324 दिन बाद फैसला सुनाया कि राष्ट्रपति बिना कांग्रेस की मंजूरी के टैरिफ लागू करने का अधिकार नहीं रखते। 9 मेंबर वाली बेंच ने 6-3 से यह निर्णय दिया। कोर्ट ने कहा कि ट्रंप ने वैश्विक टैरिफ लगाने से पहले कांग्रेस की अनुमति नहीं ली, इसलिए यह गैर-कानूनी है। हालांकि कोर्ट ने यह स्पष्ट नहीं किया कि भविष्य में व्हाइट हाउस के लिए बढ़े हुए टैरिफ के बारे में क्या कार्रवाई करनी चाहिए।
ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ कई अमेरिकी व्यवसाय और 12 राज्य पहले ही निचली अदालतों में गए थे। निचली अदालत का फैसला उनके पक्ष में गया, लेकिन एडमिनिस्ट्रेशन ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दी और निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा।
भारत और वैश्विक व्यापार पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप के जवाबी टैरिफ से लगभग $80 बिलियन के भारतीय एक्सपोर्ट पर 10-50% टैक्स लग रहा था। ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ने इसका एक बड़ा हिस्सा घटाकर 18% करने का प्रस्ताव रखा है। यदि सुप्रीम कोर्ट का फैसला बढ़े हुए टैरिफ को खत्म करता है, तो कई मामलों में टैरिफ दरें और कम हो सकती हैं।
ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद बढ़े हुए टैरिफ को वापस लेने की चिंता नहीं कर रहे। इस फैसले का अमेरिकी ट्रेड सेक्टर और फिस्कल डेफिसिट पर क्या असर होगा, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है।
अमेरिका और वैश्विक प्रतिक्रिया
व्हाइट हाउस के अलावा किसी भी देश ने तुरंत प्रतिक्रिया नहीं दी। सभी ट्रंप के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं। ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि प्रशासन टैरिफ को लागू रखने की कोशिश करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के इस कदम से अमेरिका में घरेलू उद्योगों को फायदा हो सकता है, लेकिन विदेशी सामान महंगा होगा और वैश्विक व्यापारिक तनाव बढ़ सकता है। भारत और अन्य देशों के एक्सपोर्ट पर टैक्स दरों में बदलाव संभव है, जिससे व्यापारियों को राहत मिल सकती है।
ट्रंप का यह कदम स्पष्ट करता है कि टैरिफ को रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करना उनका तरीका है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे सीमित किया है, लेकिन भारत समेत अन्य देशों के लिए यह महत्वपूर्ण मोड़ है। भविष्य में किए गए द्विपक्षीय समझौते और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियों पर इसका असर पड़ सकता है।