नई दिल्ली : रेलवे के ऐप को लेकर भ्रम के दिन खत्म। यात्रियों की सुविधा के लिए अब केवल ‘रेल-वन’ ऐप (Rail One)। शुक्रवार शाम भारतीय रेलवे ने यही जानकारी दी। लंबे समय से भारतीय रेलवे के यात्री एक तरह के ‘डिजिटल भ्रम’ वाले दिन बिता रहे थे। कई ऐप्स के चक्कर में उनका भ्रमित होना रोज का मामला बन गया था।
दूरदराज की ट्रेनों में बर्थ आरक्षित करने के लिए एक ऐप, उपनगरीय लोकल ट्रेनों के लिए दूसरा ऐप, और ट्रेनों को ट्रैक करने के लिए एक और ऐप। यात्रा शुरू होने से पहले कई पासवर्ड और बार-बार लॉग-इन करने की डिजिटल जद्दोजहद शुरू हो जाती थी। अब यह झंझट खत्म हो रही है। अब काम करेगा केवल ‘रेल-वन’ ऐप।
रेलवे बता रहा है कि यह एक ऐसा ‘सुपर ऐप’ है, जिसे रेलवे की विशाल और जटिल व्यवस्था को एक ही सहज इंटरफेस में लाने के लिए बनाया गया है। इतने लंबे समय तक भारतीय रेलवे समानांतर रूप से कई ऐप चला रहा था। दूरदराज की ट्रेनों में सीट आरक्षण के लिए यात्री ‘IRCTC Rail Connect’ इस्तेमाल करते थे, लोकल ट्रेन के टिकट के लिए ‘UTS-on-Mobile’ और ट्रैकिंग के लिए अन्य ऐप।
काफी समय से रेलवे की योजना थी कि एक ‘सुपर ऐप’ लॉन्च करके सभी समस्याओं का समाधान किया जाए। इसके लिए कुछ समय पहले ही ‘रेल-वन’ ऐप लॉन्च किया गया था। लेकिन वह ऐप अन्य ऐप्स के साथ समानांतर रूप से चल रहा था। अब रेलवे ने बताया कि बाकी ऐप्स बंद करके अब केवल एक ही ऐप चलाया जाएगा।
इस ‘रेल-वन’ ऐप में आईडी बनाने के लिए यूजर को अपना आधार नंबर देना अनिवार्य होगा। इससे एक ही व्यक्ति के लिए कई आईडी बनाना असंभव होगा। नकली यूजर आईडी बनाकर टिकट बुक करने की कोशिश को रोकने में रेलवे लंबे समय से प्रयासरत था। यह ऐप वह काम आसान बनाएगा।
टिकट बुकिंग के अलावा यह ऐप एक साथ रियल-टाइम कंसीयर्ज या डिजिटल सहायक के रूप में भी काम करेगा। यह ‘लाइव ट्रेन स्टेटस’ और ‘PNR ट्रैकर’ की सुविधाएं देगा, साथ ही ‘कोच पोजिशन फाइंडर’ यानी ट्रेन का कौन सा डिब्बा कहां रुकने वाला है, यह भी बताएगा। इसमें ‘ई-कैटरिंग’ की सुविधा भी है, जिससे सीधे सीट पर ही भोजन पहुंच जाएगा। ‘रेल मदद’ के अंतर्गत चिकित्सा-संबंधी सहायता या सफाई से जुड़ी शिकायतें भी सीधे रेलवे प्राधिकरण तक पहुंचेंगी।