नई दिल्लीः सांसद शशि थरूर ने इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में ओपन डेटा को लेकर स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि खुले डेटा से लोकतांत्रिक जवाबदेही, नवाचार और विकास को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि यह भी कहा कि इसके लिए एक मजबूत नियामक ढांचा जरूरी है। थरूर ने कहा कि पारदर्शिता का मतलब यह नहीं कि व्यक्तिगत अधिकारों की हिफाजत न हो।
थरूर ने उदाहरण देते हुए बताया कि जब अमेरिका ने मौसम संबंधी डेटा सार्वजनिक किया तब इससे निजी क्षेत्र में नए व्यवसाय और तकनीकी विकास हुए। कोविड-19 के दौरान खुले स्वास्थ्य डेटा ने सरकारी समन्वय तेज किया और जनता को बेहतर जानकारी मिली।
उन्होंने चेतावनी दी कि बिना सही दिशा और सुरक्षा के खुले डेटा से असंतुलन पैदा हो सकता है। दुनिया के बड़े क्लाउड और एआई सिस्टम कुछ विदेशी कंपनियों के नियंत्रण में हैं। यदि विकासशील देश अपनी डिजिटल क्षमता और नियमन मजबूत नहीं करेंगे तो वे केवल डेटा सप्लायर बनकर रह जाएंगे।
थरूर ने कहा कि समाधान डेटा बंद करना नहीं बल्कि उसे ‘गार्डरेल्स’ के साथ इस्तेमाल करना है। डेटा जारी करने का उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए और उसमें मजबूत अनामिकरण और निजता सुरक्षा होनी चाहिए। उन्होंने भारत के डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे आधार, यूपीआई और डिजीलॉकर का उदाहरण दिया। थरूर ने कहा कि भारत ने डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को विकास का सार्वजनिक साधन बनाया है।
थरूर के अनुसार, भारत केवल डेटा का उपयोग नहीं कर रहा, बल्कि इसे डिजिटली भविष्य का ‘निर्माता’ बनाने का काम कर रहा है।