राज्य में SIR के तथ्यों की जांच का काम करेंगे ज्यूडिशियल अधिकारी। सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ पश्चिम बंगाल के लिए ही यह फैसला सुनाया है। साथ ही कहा गया है कि कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के तत्वावधान में जिला अदालत के न्यायाधीश, अतिरिक्त जिला न्यायाधीश और रिटायर्ड न्यायाधीश की कमेटी ही अंतिम फैसला लेंगे। राज्य की सत्ताधारी पार्टी के साथ ही विरोधी पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत किया है।
तृणमूल का दावा है कि विचार विभाग के तत्वावधान में SIR करने की मांग सबसे पहले उन्होंने की थी। दूसरी ओर भाजपा का दावा है कि राज्य सरकार चुनाव आयोग से सहयोग नहीं कर रही है। इस वजह से मजबूरी में सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है।
SIR के काम को लेकर राज्य सरकार और चुनाव आयोग एक-दूसरे के खिलाफ आरोप-प्रत्यारोप की बात को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी नाराजगी जतायी। पिछली सुनवाई में राज्य की तरफ से ग्रुप बी अधिकारियों को देने की बात कही गयी थी लेकिन पर्याप्त संख्या में ग्रुप बी अधिकारी क्यों नहीं दिया गया?
इस मुद्दे पर भी सुप्रीम कोर्ट में सवाल उठा। आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शनिवार को कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के साथ चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी बैठक करेंगे। उनके अलावा इस बैठक में राज्य के मुख्यसचिव, डीजीपी और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे। वहीं रिटायर्ड व कार्यरत डिस्ट्रिक्ट जज व एडिशन डिस्ट्रिक्ट जज में से ज्यूडिशियल अधिकारी के तौर पर चुन लेंगे।
आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकारी मुख्यमंत्री की मांग - तृणमूल
इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा गया है कि देश के संविधान में लोगों के अधिकारियों को प्राथमिकता दी गयी है और आज सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले से वहीं बात साबित होती है। SIR की प्रक्रिया में Logical discrepancies के नाम पर मुख्य चुनाव आयुक्त जिस प्रकार मनमानी कर रहे हैं, वह खेल खत्म! अब तक किसी वोटर का नाम शामिल करने के लिए ERO का फैसला लेने के बाद भी चुनाव आयोग के किसी प्रतिनिधि ने किसी न किसी बहाने से बाधा डाली गयी थी।
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तृणमूल कांग्रेस ने दावा किया कि विचार विभागीय अधिकारियों की निगरानी में SIR का काम करने की बात पहले ही कहा गया था। तृणमूल के आधिकारिक पोस्ट में कहा गया है, 'सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मांग को ही मान्यता दी। खुद को संविधान से भी ऊपर मानने वाले चुनाव आयोग का दंभ आज टूट कर बिखर गया। सुप्रीम कोर्ट ने एक असाधारण फटकार के माध्यम से उनका एकतरफा नियंत्रण छीन लिया। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि Logical discrepancies का केस और मतदाता सूची को लेकर कोई शिकायत या समस्या अब से निरपेक्ष न्यायाधीश ही देखेंगे।'
भाजपा-सीपीएम ने क्या कहा?
दूसरी तरफ भाजपा के प्रवक्ता देवजीत सरकार ने कहा, 'SIR के काम में तृणमूल सरकार और उनके अधिकारी जिस प्रकार शुरुआत से बाधा पहुंचा रहे थे, जिस प्रकार डाटा एंट्री ऑपरेटर की नियुक्ति के समय से समस्याएं पैदा की जा रही है, सरकारी सम्पत्ति को नष्ट किया जा रहा है, बीडीओ ऑफिस में आग लगायी जा रही है, उनके खिलाफ राज्य सरकार ने क्या कदम उठाया या चुनाव आयोग क्या कदम उठाता है हम यह देखना चाहते हैं।'
वहीं दूसरी तरफ सीपीएम के प्रदेश सचिव मोहम्मद सलीम ने कहा कि पश्चिम बंगाल पिछले 3 महीने से ट्रॉमा से गुजर रहा है। राज्य और केंद्र सरकार, चुनाव आयोग का काम आम लोगों को निश्चिंत करना है। लेकिन सरकार के कितने बेकार होने, चाहे वह केंद्र की हो या राज्य की, कमीशन को ज्यूडिशियल अधिकारियों को नियुक्त करना पड़ता है।