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आर्थिक संकट से ‘जायंट किलर’ — जिम्बाब्वे के उत्थान का सफर आसान नहीं

जिम्बाब्वे के मुख्य कोच जस्टिन सैमन्स ने बताया कि यह सफलता अचानक नहीं आई। लगभग 20 महीने पहले से ही इसकी योजना बनाई जा रही थी।

By तानिया रॉय, Posted by: प्रियंका कानू

Feb 20, 2026 21:40 IST

नई दिल्ली: कड़ी मेहनत के बाद जो आत्मविश्वास और आंतरिक शक्ति बनती है, वही अब जिम्बाब्वे टीम में स्पष्ट नजर आ रही है। अतिरिक्त उत्साह या बड़े बयान नहीं बल्कि अपनी क्षमताओं की स्पष्ट समझ के साथ टीम आगे बढ़ रही है। लंबे यात्रा समय और लगातार मैचों के दबाव के बावजूद टीम ने अपने लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए मैदान में उतरना जारी रखा। 2026 के T20 वर्ल्ड कप के ग्रुप चरण समाप्त होते ही जिम्बाब्वे एक नई मिसाल बन चुका है।

जर्सी पर उल्टे ‘V’ आकार की डिजाइन के कारण उन्हें ‘शेवरन्स’ के नाम से जाना जाता है। यह प्रेरणा ऐतिहासिक ग्रेट जिम्बाब्वे स्टोन मॉन्यूमेंट से ली गई थी। इस बार शेवरन्स ने सुपर 8 में जगह बनाई, जो उनके लिए बड़ी सफलता है।

योजना का नतीजा, अचानक नहीं

कोच जस्टिन सैमन्स के अनुसार, यह सफलता अचानक नहीं आई। लगभग 20 महीने पहले ही लक्ष्य तय किया गया था और अब वह पूरा हुआ। जिम्बाब्वे क्रिकेट के मैनेजिंग डायरेक्टर गिवमोर मकोनियो ने कहा, ‘यह कोई संयोग नहीं है। हमने सचेत रूप से आईसीसी फ्यूचर टूर प्रोग्राम अपनाया, साल में लगभग 10 टेस्ट मैच खेले, टीम बनाने के लिए। नियमित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट ने हमारी संरचना को मजबूत किया और प्रतियोगिता के माध्यम से हमने खुद को बेहतर बनाया।’

ग्रुप स्टेज से सुपर 8 तक जिम्बाब्वे

टी20 वर्ल्ड कप में जिम्बाब्वे शानदार फॉर्म में है। उन्होंने ओमान, श्रीलंका और मजबूत ऑस्ट्रेलिया को हराकर ध्यान खींचा। आयरलैंड के खिलाफ उनका मैच बारिश के कारण रद्द हुआ। 17 फरवरी को पल्लेकले में आयरलैंड के खिलाफ टॉस बिना मैच के रद्द हुआ, लेकिन इससे ज़िम्बाब्वे सुपर 8 में पहुंचने से नहीं रुका। यह देश के क्रिकेट इतिहास में बड़ी उपलब्धि है।

आर्थिक संकट से ‘जायंट किलर’ तक

एक समय दुनिया की बड़ी टीमें ज़िम्बाब्वे से डरती थीं। 80 और 90 के दशक में यह टीम बेहद मजबूत थी। 1992 में टेस्ट का दर्जा मिलने के बाद उन्होंने बड़े टूर्नामेंट और द्विपक्षीय सीरीज में बड़ी टीमों को हराया और ‘जायंट किलर’ के नाम से मशहूर हुए।

नई शुरुआत

इस विश्व कप में ज़िम्बाब्वे की प्रदर्शन ने फिर से सबको चौंका दिया। हालांकि टी20 फॉर्मेट में, यह वापसी आसान नहीं थी। टीम अब स्टार खिलाड़ियों पर नहीं बल्कि सामूहिक प्रयासों पर निर्भर कर रही है। घरेलू क्रिकेट का पुनर्निर्माण, युवा क्रिकेट में निवेश और प्रशासनिक स्थिरता ने उन्हें धीरे-धीरे मजबूत किया। आईसीसी की आर्थिक सहायता और बेहतर प्रबंधन ने इस पुनर्निर्माण में बड़ी भूमिका निभाई।

अधिनायक राजा ने कहा, ‘हम आगे देखने और बढ़ने के लिए तैयार हैं। किसी ने हमें मौका नहीं दिया, लेकिन हमने सभी का सम्मान जीता। मैच दर मैच आगे बढ़ेंगे। सुपर 8 में तीन में से अगर हम दो जीतते हैं, तो क्या हो सकता है, कौन जानता है! हर कोई अंडरडॉग की कहानी पसंद करता है। अभी मेरा ध्यान केवल अगले मैच पर है।’

अब सिर्फ अंडरडॉग नहीं

ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम को हराकर जिम्बाब्वे ने विश्व क्रिकेट में सम्मान हासिल किया। सुपर 8 में उन्हें भारत, वेस्ट इंडीज और दक्षिण अफ्रीका जैसी मजबूत टीमें मिली हैं। अब जिम्बाब्वे की जीत को केवल ‘अघटना’ नहीं कहा जा सकता। उन्होंने साबित किया कि वे अब सिर्फ अंडरडॉग नहीं बल्कि मजबूत प्रतियोगी हैं।

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