अहमदाबाद : अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में नीदरलैंड्स के खिलाफ अपने ग्रुप चरण के चौथे और अंतिम मुकाबले में भारत ने जीत दर्ज की। इससे पहले पाकिस्तान को हराकर टीम ने सुपर-आठ में जगह पक्की कर ली थी। इसलिए यह मैच दोनों टीमों के लिए ज्यादा महत्व का नहीं था। अमेरिका से हारकर डच टीम पहले ही टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी थी।
स्कॉट एडवर्ड्स की अगुवाई वाली नीदरलैंड्स टीम के खिलाफ शिवम दुबे ने बल्ले और गेंद दोनों से दमदार प्रदर्शन किया। टॉस जीतकर सूर्यकुमार यादव ने पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। हालांकि अभिषेक शर्मा खाता भी नहीं खोल सके और ईशान किशन भी जल्दी आउट हो गए।
इसके बाद दुबे ने जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने मात्र 31 गेंदों में 66 रन की विस्फोटक पारी खेली, उनका स्ट्राइक रेट 212.90 रहा। अपनी पारी में उन्होंने 6 छक्के और 4 चौके लगाए।
मैच के बाद स्टार स्पोर्ट्स पर पार्थिव पटेल से बातचीत में शिवम दुबे ने बताया कि कैसे भारत के पूर्व कप्तान एमएस धोनी की सलाह से उन्होंने अपने खेल में बदलाव किया। 2022 से चेन्नई सुपर किंग्स में धोनी और दुबे साथ खेल रहे हैं वहीं से दोनों के बीच करीबी रिश्ता बना।
स्टार स्पोर्ट्स पर दुबे ने कहा कि आईपीएल की शुरुआत में मुझे शॉर्ट गेंदों के खिलाफ दिक्कत होती थी। मैं सही तरीके से शॉट नहीं लगा पाता था। बाद में समझ आया कि इस स्तर पर दबदबा बनाने के लिए इस कमजोरी को दूर करना जरूरी है। इसलिए ऑफ-सीजन में मैंने इस पर काफी मेहनत की।
उन्होंने आगे कहा कि माही भाई ने कहा था कि हर गेंद पर छक्का मारना जरूरी नहीं है। चौका लगाओ या एक रन लो। जब भी क्रीज पर उतरता हूं, यही बात याद रखता हूं।
आंकड़े बताते हैं कि 2024 T20 विश्व कप के बाद दुबे के प्रदर्शन में काफी सुधार हुआ है। विश्व कप तक तेज गेंदबाजों के खिलाफ उनका स्ट्राइक रेट 133.7 और औसत 38 था। स्पिनरों के खिलाफ स्ट्राइक रेट 131.7 और औसत 22.8 था। विश्व कप के बाद तेज गेंदबाजों के खिलाफ उनका स्ट्राइक रेट बढ़कर 171.9 हो गया और औसत लगभग 30.6 हो गया। स्पिनरों के खिलाफ स्ट्राइक रेट 182.5 और औसत 47 हो गया जो उनके सुधार का प्रमाण है।
इससे पहले पाकिस्तान के खिलाफ 17 गेंदों में 27 रन और एक अन्य मैच में 16 गेंदों में 23 रन बनाकर उन्होंने मध्य ओवरों में टीम को संभाला था। अंतिम मैच में गेंद से भी 2 विकेट लेकर शिवम दुबे को ‘मैन ऑफ द मैच’ चुना गया। इस विश्व कप के ग्रुप चरण के चार मैचों में भारत के चार अलग-अलग खिलाड़ियों का ‘मैन ऑफ द मैच’ बनना यह दिखाता है कि टीम किसी एक खिलाड़ी पर निर्भर नहीं है बल्कि पूरी टीम मजबूत है।