कोलकाता : रणजी ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन करते हुए जम्मू-कश्मीर पहली बार फाइनल में पहुंचा है लेकिन इस बड़ी सफलता के बीच एक असहज तस्वीर सामने आई है। कल्याणी में सेमीफाइनल मैच में बंगाल को हराने के बाद जम्मू-कश्मीर के कुछ खिलाड़ियों को टोटो से होटल लौटते देखा गया। एक खिलाड़ी की यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होते ही बोर्ड की भूमिका पर सवाल उठने लगे। सवाल यह है कि दुनिया के सबसे अमीर क्रिकेट बोर्डों में से एक भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के घरेलू टूर्नामेंट में खिलाड़ियों को ऐसी स्थिति का सामना क्यों करना पड़ा?
टोटो से क्यों करना पड़ा सफर?
बंगाल और जम्मू-कश्मीर के बीच सेमीफाइनल मुकाबला कल्याणी के बंगाल क्रिकेट अकादमी मैदान में खेला गया। जानकारी के मुताबिक यह मैदान टीम होटल से महज 500 मीटर की दूरी पर है। इसी कारण कई बार खिलाड़ी खुद ही टोटो लेकर होटल लौटे। एक पत्रकार का दावा है कि इसमें बोर्ड की सीधी गलती नहीं है। हर टीम के लिए बस की व्यवस्था रहती है लेकिन बस आने में देरी होने पर कुछ खिलाड़ी जल्दी होटल पहुंचने के लिए टोटो का इस्तेमाल कर लेते हैं। यह भी दावा किया गया कि पहले यहां मैच खेलने आए ईशान किशन भी इसी तरह टोटो से होटल लौटे थे।
इतिहास रच चुका है जम्मू-कश्मीर
जम्मू-कश्मीर के लिए इस बार की रणजी ट्रॉफी किसी सपने से कम नहीं है। पहली बार टीम फाइनल में पहुंची है। सेमीफाइनल में मजबूत बंगाल को 6 विकेट से हराकर टीम ने इतिहास रच दिया। मैच की पहली पारी में बंगाल ने 328 रन बनाए। जवाब में जम्मू-कश्मीर ने 302 रन बनाए। दूसरी पारी में बंगाल सिर्फ 99 रन पर सिमट गया। इसके बाद 4 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर जम्मू-कश्मीर ने फाइनल का टिकट पक्का किया।
1959 में रणजी ट्रॉफी में पदार्पण करने वाली इस टीम ने 67 साल बाद पहली बार सेमीफाइनल और फाइनल में जगह बनाकर लंबा सूखा खत्म किया है। अब आकिब नबी, अब्दुल समद और उनके साथी खिताब से सिर्फ एक कदम दूर हैं।
आकिब नबी बने जीत के नायक
टीम की इस ऐतिहासिक सफलता के प्रमुख नायक तेज गेंदबाज आकिब नबी दार रहे हैं। उन्होंने 9 मैचों में 55 विकेट लिए हैं। इस टूर्नामेंट में वह 6 बार पांच विकेट लेने का कारनामा कर चुके हैं। उनके लगातार शानदार प्रदर्शन ने जम्मू-कश्मीर को फाइनल तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है।