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₹117 करोड़ की लागत से कोलकाता का 'फोल्डिंग' ब्रिज बनेगा अत्याधुनिक, क्या-क्या होंगे इसमें प्रमुख बदलाव?

यह ब्रिज ठीक उसी तरह से कोलकाता की लाइफलाइन है, जैसे हावड़ा और द्वितीय हुगली सेतु हुआ करते हैं।

By Moumita Bhattacharya

Feb 19, 2026 19:53 IST

कोलकाता की ऐतिहासिक धरोहरों से लेकर हावड़ा ब्रिज जैसे इंजीनियरिंग के शानदार नमूनों, विक्टोरिया मेमोरियल की अद्भूत संरचना और साइंस सिटी के हैरान करने वाले वैज्ञानिक प्रयोगो तक के बारे में अक्सर चर्चाएं होती रहती हैं। लेकिन इन सबके बीच एक ऐसी संरचना भी मौजूद है जो संभवतः कोलकाता को लीक से हटाकर खड़ा करता है।

कुछ समय पहले जब दक्षिण भारत में तमिलनाडु की मुख्य भूमि को रामेश्वर द्वीप से जोड़ने वाले नए पंबन ब्रिज का उद्घाटन किया गया, तब इसकी सबसे बड़ी खासियतों में यह भी कहा गया था कि आवश्यकता होने पर इस ब्रिज को बीच से ही मोड़ा जा सकता है। लेकिन अक्सर लोग यह भूल जाते हैं कि इस तरह की शानदार इंजीनियरिंग का नमूना कोलकाता में पहले से ही मौजूद है। हम बात कर रहे हुगली नदी के पूर्वी तट पर मौजूद बास्क्यूल ब्रिज (Bascule Bridge) की।

Indian Express की मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार इस ब्रिज का निर्माण 1966 में किया गया था। यह आज भी महानगर में अपनी तरह का एकलौता ब्रिज है। पर आज अचानक हम इस ब्रिज के बारे में क्यों बात कर रहे हैं? दरअसल, हाल ही में इस ब्रिज की देखरेख की जिम्मेदारी संभालने वाले श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट, कोलकाता (SMPK) ने ₹117.54 करोड़ की लागत से बास्क्यूल ब्रिज के आधुनिकीकरण परियोजना की घोषणा की है।

क्या है इसकी खासियत?

बास्क्यूल ब्रिज की सबसे बड़ी खासियत इसका बीच में से खुल जाना है। जब भी कार्गो जहाज आते हैं, इस ब्रिज को बीच में से खोल दिया जाता है और ब्रिज ऊपर की ओर उठ जाता है। नीचे से कार्गो जहाज के गुजर जाने के बाद ब्रिज को धीरे-धीरे फिर सामान्य परिस्थिति में ला दिया जाता है, जिसके बाद यातायात फिर से सामान्य हो जाती है।

एक प्रकार से कहा जा सकता है कि यह ब्रिज ठीक उसी तरह से कोलकाता की लाइफलाइन है, जैसे हावड़ा और द्वितीय हुगली सेतु हुआ करते हैं। वर्तमान में यह ब्रिज गार्डनरिच और मेटियाब्रुज को जोड़ने का काम करता है। बताया जाता है कि करीब 1,640 टन स्टील से इस ब्रिज का निर्माण किया गया था।

मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) और विशेषज्ञ इंजीनियरों के साथ मिलकर इस ब्रिज के आधुनीकिकरण की व्यवस्था की जा रही है। इस बारे में मीडिया से बात करते हुए SMPK के चेयरपर्सन रथींद्र रमन ने बताया कि हम सिर्फ एक ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण कर रहे हैं बल्कि पोर्ट तक आवाजाही की गति को बढ़ाने और सुरक्षा को सुनिश्चित करने का काम भी कर रहे हैं। बताया जाता है कि इस ब्रिज के मेकओवर में इलेक्ट्रो-मेकैनिकल सिस्टम की मरम्मत की जाएगी।

क्या-क्या होगा बदलाव :

हाइड्रोलिक सिस्टम : इलेक्ट्रो-मैकेनिकल सिस्टम की पूरी मरम्मत।

स्ट्रक्चरल स्पाइन : मॉडर्न हेवी-ड्यूटी ट्रैफिक को संभालने के लिए बड़े स्टील लीव्स को मजबूत करना।

मंत्रालय से मिला समर्थन : यह परियोजना भारत के समुद्री भविष्य के लिए इतना ज़रूरी है कि मंत्रालय ने सागरमाला परियोजना के तहत ₹40 करोड़ आवंटित किए हैं।

इस ब्रिज का आधुनिकीकरण मई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बताया जाता है कि आधुनिक बनाने के बावजूद यह ब्रिज दिखने में बिल्कुल वैसा ही लगेगा जैसा 1960 के दशक में लगता था लेकिन यह 21वीं सदी की सारी तकनीकों से लैस होगा।

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