नई दिल्ली : पवित्र रमजान माह का आरंभ होते ही पूरे भारत में हर्ष और उल्लास का वातावरण बन गया है। चांद दिखाई देने के साथ ही मुसलमानों ने पहले रोजे के साथ इस पाक महीने की शुरुआत की। मस्जिदों में नमाज अदा की जा रही है बाजारों में रौनक बढ़ गई है और घरों में सहरी व इफ्तार की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।
रमजान इस्लामी चंद्र कैलेंडर का नौवां महीना है, जो 29 या 30 दिनों का होता है। इसकी अवधि चांद दिखने पर निर्भर करती है। इस दौरान रोजा रखने वाले मुसलमान सूर्योदय से सूर्यास्त तक खाने-पीने से परहेज करते हैं। भारत में पहले दिन रोजे का समय लगभग सुबह 5:37 बजे से शाम 6:15 बजे तक रहा, जो आगे चलकर 13 घंटे से अधिक हो सकता है।
इस्लामी परंपरा के अनुसार, वर्ष 610 ईस्वी में रमजान के महीने में पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब पर कुरान की पहली आयतें अवतरित हुई थीं। बाद में रोजा रखना मुसलमानों पर अनिवार्य किया गया और इसे इस्लाम के पांच स्तंभों में शामिल किया गया।
रमजान आत्मसंयम, इबादत और आत्मशुद्धि का महीना है। रोजे का उद्देश्य केवल भूखा-प्यासा रहना नहीं, बल्कि अपने भीतर तकवा यानी अल्लाह के प्रति सजगता और भय को मजबूत करना है। इस महीने में पांच वक्त की नमाज - फज्र, जुहर, असर, मगरिब और ईशा अदा की जाती है। लोग कुरान की तिलावत, दुआ और जरूरतमंदों की सहायता पर विशेष ध्यान देते हैं।
रोजेदार सुबह सहरी करते हैं और सूर्यास्त के बाद इफ्तार से रोजा खोलते हैं। परिवार और मित्र एक साथ इफ्तार में शामिल होते हैं, जिससे आपसी प्रेम और एकता का संदेश मजबूत होता है। बीमार, बुजुर्ग या सफर पर रहने वालों को बाद में रोजे पूरे करने की छूट दी गई है।
रमजान के समापन पर ईद-उल-फितर मनाई जाएगी, जो त्याग, भाईचारे और आध्यात्मिक सफलता का प्रतीक है।