नई दिल्ली: दृष्टिहीन लोगों के लिए आसपास की दुनिया को समझना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। अब इस चुनौती को कुछ हद तक आसान बनाने के लिए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ने बड़ा कदम उठाया है। सोमवार को एआई संचालित स्मार्ट विजन चश्मे 53 दृष्टिहीन और गंभीर रूप से कम दृष्टि वाले लोगों को वितरित किए गए। यह चश्मा ध्वनि के माध्यम से आसपास के वातावरण को समझने में मदद करता है।
यह स्मार्ट चश्मा दृश्य जानकारी को आवाज में बदल देता है। यह मुद्रित पाठ पढ़कर सुना सकता है। सामने मौजूद वस्तुओं, दरवाजों या बाधाओं की पहचान कर सकता है। यहां तक कि लोगों के चेहरे पहचानने में भी मदद करता है। इससे उपयोगकर्ता बिना किसी सहायता के कई दैनिक कार्य स्वयं कर सकेंगे।
इस पहल के तहत 28 बच्चों और 25 वयस्कों को पहले चरण में यह चश्मा दिया गया। प्रत्येक चश्मे की कीमत लगभग 35 हजार रुपये है लेकिन प्रोजेक्ट दृष्टि के तहत इन्हें पूरी तरह निःशुल्क वितरित किया गया। इस परियोजना में एम्स के साथ रोटरी और विजन एड जैसी संस्थाएं भी शामिल हैं। एम्स के सामुदायिक नेत्र विज्ञान विभाग के डॉक्टरों का कहना है कि यह चश्मा केवल एक सहायक उपकरण नहीं बल्कि स्वतंत्र जीवन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। एक वर्ष तक उपयोगकर्ताओं की प्रगति पर नजर रखी जाएगी, ताकि उनके जीवन की गुणवत्ता में आए बदलाव का आकलन किया जा सके।
भारत में लगभग एक करोड़ लोग दृष्टिहीनता या गंभीर दृष्टि समस्याओं से जूझ रहे हैं। कई मामलों में सर्जरी संभव नहीं होती, ऐसे में पुनर्वास ही आत्मनिर्भर जीवन का मुख्य आधार बनता है। इस तरह की तकनीक उन्हें अधिक स्वतंत्र और आत्मविश्वासी बना सकती है। नई पीढ़ी के इन स्मार्ट चश्मों का निर्माण एसएचजी टेक्नोलॉजीज ने किया है। पहले के मॉडलों की तुलना में यह हल्के और अधिक उन्नत हैं। सेंसर और एआई तकनीक की मदद से यह तेजी से जानकारी का विश्लेषण कर उसे ध्वनि में बदल देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक दृष्टिहीन लोगों के जीवन में नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है।