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सीएए की संवैधानिक वैधता पर सुप्रीम कोर्ट में अंतिम सुनवाई 5 मई से, 12 मई तक निर्णय प्रक्रिया पूरी होने की संभावना

नागरिकता संशोधन कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर कानूनी घमासान तेज, सुप्रीम कोर्ट ने तय किया विस्तृत सुनवाई का कार्यक्रम, असम और त्रिपुरा मामलों पर भी होगी अलग बहस।

By डॉ. अभिज्ञात

Feb 19, 2026 19:22 IST

नई दिल्ली : भारत के सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 (सीएए) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक समूह पर अंतिम सुनवाई के लिए 5 मई 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह का कार्यक्रम तय किया है।

सीएए को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं की दलीलें 5 मई को सुनी जाएंगी और 6 मई को आधे दिन तक सुनवाई होगी। इसके बाद 6 मई के शेष आधे दिन और 7 मई को केंद्र सरकार अपनी दलीलें पेश करेगी। सरकार इस कानून का समर्थन कर रही है।

याचिकाओं में कहा गया है कि यह कानून छह निर्दिष्ट धार्मिक अल्पसंख्यकों हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई पर लागू होता है, जबकि अन्य कथित रूप से उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों जैसे बांग्लादेश के रोहिंग्या और पाकिस्तान के अहमदिया समुदाय को इससे बाहर रखा गया है।

पीठ ने यह भी संकेत दिया कि असम और त्रिपुरा से जुड़े विशेष मुद्दों पर अलग से सुनवाई मुख्य मामलों की दलीलें पूरी होने के तुरंत बाद की जाएगी। पूरी सुनवाई 12 मई तक समाप्त होने की संभावना है।

अदालत ने कहा कि हमने पक्षकारों को यह स्वतंत्रता दी है कि वे लिखित प्रस्तुतियों के संबंध में कोई भी सामग्री या अन्य दस्तावेज चार सप्ताह के भीतर रिकॉर्ड पर रख सकते हैं। हालांकि रिकॉर्ड पर पहले से मौजूद लिखित प्रस्तुतियों के आधार पर कोई नई रिट याचिका दाखिल नहीं की जाएगी।

मालूम हो कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 का उद्देश्य अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए छह निर्दिष्ट अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों को, उन देशों में धार्मिक उत्पीड़न का हवाला देते हुए, भारतीय नागरिकता देने की प्रक्रिया को तेज करना है। यह अधिनियम 12 दिसंबर 2019 को अधिसूचित किया गया था और 10 जनवरी 2020 से लागू हुआ।

सुप्रीम कोर्ट ने 19 मार्च 2024 के अपने आदेश में सीएए नियमों पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया था। याचिकाकर्ताओं ने तत्काल स्थगन की मांग की थी और यह आशंका जतायी थी कि यदि मुकदमे के दौरान नागरिकता दे दी गई तो प्रक्रिया अपरिवर्तनीय हो जाएगी। दूसरी ओर सॉलिसिटर जनरल ने औपचारिक जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा था।

सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ताओं की चिंताओं को संज्ञान में लिया, लेकिन प्रक्रिया को तेज करने के लिए लिखित प्रस्तुतियों की समयसीमा तय की और दोनों पक्षों याचिकाकर्ताओं और केंद्र सरकार को पांच-पृष्ठ के संक्षिप्त सार तक सीमित रहने का निर्देश दिया।

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