राज्य में जब से SIR की प्रक्रिया की शुरुआत हुई है, तब से ही आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला चल रहा है। पश्चिम बंगाल के साथ अन्य 11 राज्यों में भी SIR की प्रक्रिया शुरू हुई थी। उनमें से कई राज्य ऐसे हैं जहां अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गयी है। लेकिन पश्चिम बंगाल में अभी तक सुनवाई की प्रक्रिया ही पूरी नहीं हुई थी जिस वजह से यहां अंतिम मतदाता सूची को जारी करने की तारीख में चुनाव आयोग ने बदलाव किया था।
चुनाव आयोग ने समय सीमा को दो सप्ताह के लिए बढ़ाते हुए कहा था कि 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। पर क्या सच में 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची जारी हो सकेगा?
आसार तो ऐसे दिखाई नहीं दे रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार शुक्रवार को राज्य के स्पेशल रोल ऑब्जर्वर व जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस पर बैठक हुई। इस बैठक के बाद ही चुनाव आयोग सूत्रों से यह संकेत मिल रहे हैं कि 28 फरवरी को पश्चिम बंगाल के अंतिम मतदाता सूची को जारी नहीं किया जाएगा। हालांकि राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने सभी ERO और AERO समेत DEO से जल्द से जल्द काम खत्म करने का आदेश दिया है।
लेकिन CEO ऑफिस अंतिम मतदाता सूची के जारी होने की समय सीमा मार्च के पहले सप्ताह तक बढ़ने की संभावनाओं से इनकार नहीं कर रहा है। सबसे पहले 7 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची जारी करने की बात कही गयी थी। बाद में उस तारीख में बदलाव कर 14 फरवरी निर्धारित की गयी।
लेकिन इस दिन भी चुनाव आयोग अंतिम मतदाता सूची नहीं जारी कर पाया और समय सीमा को एक बार फिर से बढाया गया। इस संबंध में जारी आखिरी विज्ञप्ति के मुताबिक 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची जारी किया जाना है, लेकिन अब संभावना जतायी जा रही है कि फिर से समय सीमा को बदला जाएगा और मार्च के पहले सप्ताह में इसे जारी किया जा सकता है। इसके साथ ही एक सवाल और घूम रहा है - कितने लोगों का नाम अंतिम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे? इस बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिली है।