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AI Impact Summit 2026: भरोसा, संतुलन और वैश्विक साझेदारी पर दुनिया की सहमति

नई दिल्ली में जुटे वैश्विक नेता और टेक विशेषज्ञ; जिम्मेदार एआई गवर्नेंस, सांस्कृतिक मूल्यों की सुरक्षा और उत्तर-दक्षिण सहयोग को मजबूत करने पर जोर।

By श्वेता सिंह

Feb 20, 2026 09:41 IST

नई दिल्लीः आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य को लेकर वैश्विक स्तर पर बढ़ती चिंताओं और संभावनाओं के बीच राजधानी नई दिल्ली में India AI Impact Summit 2026 का आयोजन किया गया। इसमें दुनिया के कई देशों के नेताओं, नीति-निर्माताओं और तकनीकी विशेषज्ञों ने सिर्फ हिस्सा ही नहीं लिया, बल्कि एक स्वर में भरोसे, संतुलन और मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, सम्मेलन का केंद्र बिंदु यह था कि एआई का विकास केवल तकनीकी प्रगति तक सीमित न रहे, बल्कि मानवता के हित, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक संतुलन के अनुरूप हो।

भारत-रूस तकनीकी साझेदारी पर जोर

रूस की प्रमुख आईटी संस्था RUSSOFT Association के अध्यक्ष वैलेन्टिन माकारोव ने भारत और रूस के बीच उभरती तकनीकों में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देश मिलकर नवाचार का नया केंद्र बना सकते हैं। उनके अनुसार, “विश्वास भविष्य की साझेदारी की नींव है और सहयोग से दोनों देशों को व्यापक लाभ होगा।”

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का विशाल डिजिटल बाजार और युवा टेक टैलेंट इसे वैश्विक एआई इकोसिस्टम का अहम स्तंभ बना सकता है।

संतुलित तकनीकी विकास पर जोर

श्रीलंका के नए राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके (Anura Kumara Dissanayake) ने कहा कि तकनीक मानव क्षमताओं को मजबूत करे, न कि सांस्कृतिक मूल्यों को कमजोर। उन्होंने एआई के विकास में संतुलन और नैतिकता को अनिवार्य बताया।

ऑस्ट्रिया की पीपुल्स पार्टी के महासचिव अलेक्जेंडर प्रॉल (Alexander Proll) ने भारत की ऊर्जा और विविधता की सराहना करते हुए कहा कि एआई का उपयोग सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए होना चाहिए। उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को दोनों पक्षों के लिए लाभकारी बताया।

स्विट्जरलैंड के फेडरल ऑफिस ऑफ कम्युनिकेशंस के महानिदेशक प्रमुख बर्नार्ड मैसन (Bernard Maissen) ने कहा कि यह पहला अवसर है, जब इस स्तर का एआई सम्मेलन ग्लोबल साउथ में हो रहा है। यह पहल उत्तर और दक्षिण के बीच तकनीकी खाई को पाटने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

एआई का वैश्विक परिदृश्य

वर्तमान में वैश्विक एआई बाजार का आकार लगभग 350 अरब डॉलर के आसपास आंका जा रहा है। 2030 तक इसके एक ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुंचने की संभावना है। ऐसे में नीति निर्माण, डेटा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर सहमति बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

सम्मेलन में इस बात पर सहमति बनी कि एआई का भविष्य केवल नवाचार से नहीं, बल्कि साझा जिम्मेदारी, पारदर्शिता और वैश्विक सहयोग से तय होगा। भारत ने इस मंच के जरिए यह स्पष्ट संकेत दिया है कि वह जिम्मेदार एआई गवर्नेंस और मानव-केंद्रित तकनीकी विकास में अग्रणी भूमिका निभाना चाहता है।

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