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ग्लोबल साउथ की आवाज बना भारत, ‘MANAV’ विजन से एआई पर नई बहस

नई दिल्ली में आयोजित India AI Impact Summit 2026 में विश्व नेताओं और टेक दिग्गजों की मौजूदगी, मानव-केंद्रित विकास पर सहमति।

By श्वेता सिंह

Feb 20, 2026 09:18 IST

नई दिल्लीः आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच भारत ने मानव-केंद्रित तकनीकी विकास का स्पष्ट संदेश दिया है। Narendra Modi ने राजधानी में आयोजित India AI Impact Summit 2026 के मंच से ‘MANAV’ एआई विजन प्रस्तुत करते हुए कहा कि एआई केवल नवाचार का साधन नहीं, बल्कि मानवता के कल्याण का माध्यम बनना चाहिए। इस पहल की सराहना करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने कहा कि यह विजन मानवता को “फुल-प्रूफ भविष्य” की दिशा दिखाता है और आने वाले समय में वैश्विक नीति निर्माण का आधार बन सकता है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि एआई मानव इतिहास का एक निर्णायक मोड़ है। जैसे औद्योगिक क्रांति और डिजिटल क्रांति ने दुनिया को नई दिशा दी है। ठीक उसी तरह एआई समाज, अर्थव्यवस्था और शासन व्यवस्था को गहराई से प्रभावित करेगा। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम मोदी ने कहा कि भारत की सोच प्रतिस्पर्धा से आगे बढ़कर सहयोग और साझा विकास की है। एआई को “ग्लोबल कॉमन गुड” यानी पूरी मानवता के साझा हित के लिए विकसित किया जाना चाहिए जिससे इसका लाभ विकसित और विकासशील-दोनों प्रकार के देशों को समान रूप से मिल सके।

‘MANAV’ विजन पांच मूल सिद्धांतों पर आधारित है-नैतिक और आचार आधारित व्यवस्था, जवाबदेह शासन, राष्ट्रीय डेटा संप्रभुता, सुलभ और समावेशी तकनीक तथा वैध और प्रमाणित प्रणाली। प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई का विकास तभी सार्थक होगा जब उसमें मानवीय मूल्यों का समावेश होगा और उसके उपयोग के लिए पारदर्शी नियम बनाए जाएंगे। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि किसी देश का डेटा उसी देश का अधिकार है और डेटा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

क्या है ‘MANAV’ विजन?

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में ‘MANAV’ शब्द का विस्तृत अर्थ समझाया:

M – Moral and Ethical Systems: एआई का विकास नैतिक मूल्यों और जिम्मेदारी के साथ हो।

A – Accountable Governance: स्पष्ट नियम, पारदर्शी निगरानी और जवाबदेह व्यवस्था।

N – National Sovereignty: डेटा पर देश का अधिकार सुरक्षित रहे।

A – Accessible and Inclusive: एआई सभी के लिए सुलभ हो, केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित न रहे।

V – Valid and Legitimate: एआई प्रणाली कानूनी, प्रमाणित और विश्वसनीय हो।

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि एआई “ग्लोबल कॉमन गुड” यानी पूरी मानवता के कल्याण के लिए होना चाहिए।

भारत बना ग्लोबल साउथ की आवाज

समिट का आयोजन नई दिल्ली के भारत मंडपम में हुआ, जहां दुनिया भर के नीति-निर्माता, उद्योगपति और तकनीकी विशेषज्ञ एकत्र हुए। सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन (Emmanuel Macron), नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री डिक शूफ (Dick Schoof) और ग्रीस के प्रधानमंत्री किरियाकोस मित्सोताकिस (Kyriakos Mitsotakis) सहित कई नेताओं से मुलाकात की। इन बैठकों में सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा, डिजिटल अवसंरचना और रणनीतिक सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

टेक दिग्गजों की मौजूदगी, वैश्विक भरोसे का संकेत

तकनीकी जगत की प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी ने भी इस समिट को विशेष महत्व दिया। Google के सीईओ सुंदर पिचाई (Sundar Pichai), OpenAI के प्रमुख सैम ऑल्टमैन (Sam Altman) और Anthropic के CEO डारियो अमोदेई (Dario Amodei) सहित कई वैश्विक टेक लीडर्स ने भाग लिया। सीईओ राउंडटेबल में जिम्मेदार एआई, पारदर्शी नियमन और वैश्विक साझेदारी पर विस्तृत चर्चा हुई।

भारत की एआई तैयारी: आंकड़ों में ताकत

प्रधानमंत्री ने भारत की तैयारियों का उल्लेख करते हुए बताया कि देश में फिलहाल 38,000 से अधिक GPU उपलब्ध हैं। अगले छह महीनों में 24,000 और जोड़े जाएंगे। स्टार्टअप्स को किफायती दरों पर उच्च स्तरीय कंप्यूटिंग सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। राष्ट्रीय डेटा प्लेटफॉर्म ‘AIKosh’ के माध्यम से 7,500 से अधिक डेटासेट और 270 से ज्यादा एआई मॉडल साझा किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि भारत केवल नई तकनीक विकसित नहीं करता, बल्कि उसे तेज गति से अपनाता भी है। देश की युवा आबादी और मजबूत डिजिटल ढांचा एआई क्रांति को गति देने में सक्षम है।

एआई के नैतिक उपयोग पर तीन बड़े सुझाव

प्रधानमंत्री ने एआई के जिम्मेदार उपयोग के लिए तीन अहम सुझाव दिए:

1. विश्वसनीय वैश्विक डेटा ढांचा तैयार किया जाए।

2. ‘ग्लास बॉक्स’ जैसे पारदर्शी सुरक्षा नियम बनाए जाएं।

3. एआई में मानवीय मूल्यों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।

उन्होंने कहा कि “एआई को मुनाफे के बजाय उद्देश्य के साथ जोड़ना होगा।”

समिट के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोहराया कि जब तकनीक और मानव विश्वास साथ चलते हैं, तभी वास्तविक परिवर्तन संभव होता है। ‘MANAV’ विजन के माध्यम से भारत ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि एआई का भविष्य केवल तेजी और दक्षता में नहीं, बल्कि नैतिकता, समावेशन और मानव हित में निहित है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल 21वीं सदी के एआई युग में भारत को वैश्विक नेतृत्व की भूमिका में स्थापित कर सकती है।

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