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पश्चिम बंगाल के डीजीपी को सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी, जरूरत पड़ी तो सख्त कार्रवाई

‘एसआईआर’ से जुड़े आयोग के कर्मचारी-अधिकारियों को मिल रही हैं धमकियां

By हिमाद्रि सरकार, Posted by डॉ. अभिज्ञात

Feb 21, 2026 19:10 IST

नई दिल्ली/कोलकाता : सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में डीजीपी विफल रहते हैं, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया के पीठ में पश्चिम बंगाल की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान यह मुद्दा उठा। पिछली सुनवाई में अदालत ने डीजीपी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

चुनाव आयोग ने पहले शीर्ष अदालत को बताया था कि एसआईआर से जुड़े उसके कर्मचारी और अधिकारी धमकियों का सामना कर रहे हैं तथा राज्य पुलिस उचित कार्रवाई नहीं कर रही है। इसी आधार पर डीजीपी से स्पष्टीकरण मांगा गया था। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने पूछा कि डीजीपी द्वारा मांगा गया हलफनामा क्या जमा हुआ है। राज्य की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने बताया कि 18 फरवरी को हलफनामा दाखिल कर दिया गया है। राज्य पुलिस के कार्यवाहक डीजीपी पीयूष पांडे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि उन्होंने कानून के अनुसार सभी कदम उठाए हैं।

इसी दौरान आयोग के वकील डी.एस. नायडू ने आरोप लगाया कि एसआईआर के काम में बाधा डालने से जुड़े कम से कम 28 मामलों में पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। आयोग के वकील ने कहा कि आयोग के प्रतिनिधियों को खुलेआम धमकियां दी जा रही हैं और राज्य के विभिन्न हिस्सों में भड़काऊ भाषण दिए जा रहे हैं, फिर भी पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही।

यह सुनकर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि यदि कानून-व्यवस्था नियंत्रित नहीं रही तो डीजीपी को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। आयोग के वकील कुछ नेताओं के नामों की सूची अदालत में रखना चाहते थे, जिनके भड़काऊ बयानों से स्थिति बिगड़ रही है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि दुर्भाग्य से चुनाव के समय देशभर में इस तरह के बयान सुनने को मिलते हैं।

अदालत ने निर्देश दिया कि अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी अगली सुनवाई में नए हलफनामे के जरिए दी जाए। यदि अगली सुनवाई तक राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति और बिगड़ती है तो उसकी जानकारी भी हलफनामे में शामिल की जाए।

डीजीपी की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि आयोग के आरोप गलत हैं और विस्तृत हलफनामे में सभी तथ्यों को रखा गया है। उन्होंने कहा कि डीजीपी ने कानून के तहत उचित कार्रवाई की है।

मुख्य न्यायाधीश ने आयोग के वकील से पूछा कि पुलिस-प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही। आयोग ने कहा कि मामला अदालत में विचाराधीन होने के कारण वे कुछ हद तक संकोच में हैं। आयोग ने एसआईआर कार्य के लिए राज्य में केंद्रीय बलों की तैनाती का सुझाव भी दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य के डीजीपी और संबंधित जिलाधिकारियों को अदालत के आदेश लागू कराने की विशेष जिम्मेदारी दी जाएगी।

इसी मुद्दे पर केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि डीजीपी की भूमिका को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है और यह चिंता केवल अदालत की नहीं बल्कि पूरे देश की है। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत को डीजीपी और राज्य प्रशासन को आवश्यक निर्देश देने चाहिए।

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