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AI और सामाजिक बदलाव: भारत का नया डिजिटल एजेंडा

विनोद खोसला का रोडमैप-शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि में तकनीक से निचले वर्ग तक पहुंच।

By श्वेता सिंह

Feb 19, 2026 18:50 IST

नई दिल्लीः नई दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026’ में टेक उद्यमी Vinod Khosla ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए भारत की आबादी के निचले आधे हिस्से तक सीधे लाभ पहुंचाने का स्पष्ट और समयबद्ध खाका पेश किया। उनका तर्क था कि अगर AI का फायदा समाज के सबसे वंचित तबकों तक नहीं पहुंचा, तो तकनीकी क्रांति का वास्तविक अर्थ अधूरा रह जाएगा।

खोसला ने कहा कि अगले एक से दो वर्षों में AI को बड़े पैमाने पर लागू कर 1.5 अरब लोगों तक तत्काल और सार्थक प्रभाव पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने तीन प्राथमिक क्षेत्रों-AI-आधारित व्यक्तिगत ट्यूटर, 24x7 AI डॉक्टर और AI-संचालित कृषि सलाहकार को इस परिवर्तन की धुरी बताया।

1. शिक्षा: AI ट्यूटर से सीखने की खाई पाटने की कोशिश

खोसला के अनुसार ग्रामीण भारत में लाखों बच्चों को पर्याप्त शैक्षणिक सहयोग नहीं मिल पाता। कई जगह शिक्षक नियमित रूप से उपलब्ध नहीं होते। ऐसे में AI ट्यूटर व्यक्तिगत स्तर पर सीखने की कमी को पहचानकर उसे दूर कर सकते हैं।

उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी द्वारा संचालित गैर-लाभकारी संस्था CK-12 फाउंडेशन AI-सक्षम शिक्षण सहयोग उपलब्ध करा रही है। भारत में लगभग 40 लाख छात्र पहले ही AI ट्यूटर से लाभान्वित हो चुके हैं। ये टूल्स CBSE पाठ्यक्रम और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप हैं तथा अंग्रेजी सहित अन्य आधिकारिक भाषाओं में उपलब्ध हैं।

खोसला ने सरकारी डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म DIKSHA को ‘AI-फर्स्ट’ अनुभव में बदलने के लिए ‘सरवम’ के साथ मिलकर DIKSHA 3.0 विकसित करने की पहल का भी उल्लेख किया। इसमें शिक्षक प्रशिक्षण मॉड्यूल भी शामिल होगा।

2. स्वास्थ्य: 24x7 AI डॉक्टर की परिकल्पना

खोसला का दूसरा बड़ा प्रस्ताव है-चौबीसों घंटे उपलब्ध AI डॉक्टर, जो न्यूनतम या शून्य लागत पर प्राथमिक उपचार, दीर्घकालिक रोग प्रबंधन, मानसिक और शारीरिक थेरेपी तथा पोषण सलाह दे सकें।

उनके अनुसार ऐसी सेवा आज विकसित देशों में भी इस स्तर पर उपलब्ध नहीं है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि गंभीर और आपात स्थितियों में मामलों को मानव डॉक्टरों तक भेजना अनिवार्य होगा। AI प्रणाली का काम प्राथमिक जांच और मार्गदर्शन देना होगा।

3. कृषि: कम साक्षर किसानों के लिए वॉयस-फर्स्ट AI सहायक

कृषि क्षेत्र के लिए खोसला ने बहुभाषी, कम साक्षरता-अनुकूल, वॉयस-आधारित AI असिस्टेंट की परिकल्पना रखी। यह फोटो के जरिए फसल और कीट पहचान, मौसम आधारित सलाह, फसल कैलेंडर, सिंचाई और पोषक तत्वों की सिफारिश, तथा एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) जैसी सेवाएं दे सकेगा।

जरूरत पड़ने पर यह प्रणाली मामलों को मानव विशेषज्ञों तक भी पहुंचा सकेगी। उनका कहना था कि ऐसी सेवाएं बेहद कम लागत में व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

4. डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर से एकीकरण

खोसला ने सुझाव दिया कि AI ट्यूटर और AI डॉक्टर जैसी सेवाओं को भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ा जाए। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि आधार प्लेटफॉर्म को AI-सक्षम पोर्टल के रूप में विकसित किया जा सकता है, जैसा कि यूपीआई ने भुगतान प्रणाली को बदला।

इसके लिए उन्होंने सेक्शन 8 के तहत एक गैर-लाभकारी कंपनी स्थापित करने का सुझाव दिया, जो शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि सेवाओं का निर्माण, संचालन और बाद में आधार इकोसिस्टम में हस्तांतरण कर सके।

5. अवसर या चूका हुआ मौका?

खोसला का स्पष्ट संदेश था-यदि AI को समाज के सबसे जरूरतमंद तबकों तक नहीं पहुंचाया गया, तो यह एक ऐतिहासिक अवसर का नुकसान होगा। उनके मुताबिक, शिक्षा, स्वास्थ्य और खेती में AI आधारित हस्तक्षेप सीधे तौर पर उसी वर्ग को सबसे ज्यादा फायदा पहुंचाएंगे, जिसे इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।

तकनीकी दृष्टि से यह दृष्टिकोण भारत के डिजिटल समावेशन मॉडल-आधार, यूपीआई और डिजिटल पब्लिक गुड्स-के अगले चरण के रूप में देखा जा सकता है। लेकिन सवाल यह भी है कि डेटा सुरक्षा, गोपनीयता, जवाबदेही और गुणवत्ता नियंत्रण जैसे मुद्दों को कैसे संतुलित किया जाएगा।

फिलहाल, खोसला का प्रस्ताव AI को ‘हाई-टेक’ प्रयोगशाला से निकालकर ‘हाई-इम्पैक्ट’ जनसेवा में बदलने की दिशा में एक साहसिक खाका पेश करता है।

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