नई दिल्ली : कृषि से उद्योग, शिक्षा से स्वास्थ्य – जैसे-जैसे समय बीत रहा है, सभी क्षेत्रों में AI पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है। इस संदर्भ में निति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने भारत सहित दक्षिण एशियाई देशों के लिए अपने AI मॉडल बनाने के महत्व की याद दिलाई। उनके अनुसार भारत और दक्षिण एशियाई देशों को स्थानीय डेटा का उपयोग करके अपने AI मॉडल विकसित करना चाहिए, जो देश के नागरिकों की जीवन गुणवत्ता में सुधार लाए। यह बात उन्होंने मंगलवार को इंडिया एआई इमपैक्ट समिट के दौरान कही।
दिल्ली में आयोजित India AI Impact Summit की एक चर्चा में अमिताभ कांत ने बताया कि AI के माध्यम से प्रगति सभी तक पहुंचाने के लिए कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी। जैसे कि यह बहुभाषी होना चाहिए और यह सुनिश्चित करना होगा कि AI सुविधाएं आम लोगों तक आसानी से पहुंच सकें।
समाचार रिपोर्ट के अनुसार अमिताभ कांत ने कहा कि AI जिस गति से विकसित हो रहा है और इसके लिए जिस मात्रा में निवेश की आवश्यकता है, उसका प्रभाव समग्र अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा और समाज में बड़ी असमानता पैदा कर सकता है। जो लोग गरीबी रेखा के नीचे हैं, क्या उन तक AI की सुविधाएं पहुंच रही हैं, यही चुनौती है। पूरे दक्षिण एशिया की जनता के जीवन में AI कितना सुधार ला सकता है, यह भी चुनौती है। इसके अलावा शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में यह कितना सुधार ला सकता है, यह भी देखना होगा।
अमिताभ कांत ने चेतावनी दी कि यदि AI के माध्यम से गरीब वर्ग तक सुविधाएं नहीं पहुंचाई गई, तो समाज में असमानता और बढ़ जाएगी। उन्होंने शिक्षा और कौशल विकास के लिए AI के इस्तेमाल की सलाह दी। साथ ही उन्होंने बताया कि AI मॉडल बहुभाषी क्यों होना चाहिए। कांत के अनुसार अगर AI बहुभाषी नहीं होगा, तो देश की बड़ी जनसंख्या इसका लाभ नहीं उठा पाएगी।