मुंबई: पूंजी बाजार में बैंकों की सक्रियता बढ़ाने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India) ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। वित्तीय सेवा कंपनी जे एम फिनांसियल की रिपोर्ट के मुताबिक, इन नियमों से बैंक अब कॉरपोरेट अधिग्रहण, विलय और ऋण आधारित खरीद जैसे बड़े सौदों को वित्त उपलब्ध करा सकेंगे आरबीआई ने 13 फरवरी 2026 को यह ढांचा जारी किया जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। बैंक चाहें तो इसे पहले भी अपना सकते हैं।
अधिग्रहण वित्तपोषण के लिए नियम सख्त
नए नियमों के तहत बैंक किसी कंपनी द्वारा दूसरी कंपनी के अधिग्रहण की कुल लागत का अधिकतम 75 प्रतिशत तक ऋण दे सकेंगे। हालांकि यह सुविधा केवल उन्हीं कंपनियों को मिलेगी जिनकी शुद्ध संपत्ति 5 अरब रुपये से अधिक हो। वही कंपनी ऐसा कर सकेंगी जिन्होंने पिछले तीन वित्तीय वर्षों में लाभ कमाया हो या जिनकी साख मजबूत हो।
अधिग्रहण के बाद कंपनी का कुल ऋण उसकी अपनी पूंजी के तीन गुना से अधिक नहीं होना चाहिए। इसका उद्देश्य अत्यधिक कर्ज से पैदा होने वाले वित्तीय जोखिम को सीमित करना है।
साथ ही, बैंकों की कुल पूंजी आधार के मुकाबले पूंजी बाजार में जोखिम 40 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा, जिसमें से केवल 20 प्रतिशत अधिग्रहण वित्तपोषण के लिए निर्धारित है।
निवेशकों के लिए राहत की खबर
आरबीआई ने प्रतिभूतियों के बदले व्यक्तिगत ऋण की सीमा बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर दी है। इसमें से 25 लाख रुपये तक शेयर खरीदने में उपयोग किए जा सकेंगे। इसके अलावा, प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम, अनुवर्ती सार्वजनिक निर्गम और कर्मचारी शेयर विकल्प योजना में निवेश के लिए भी 25 लाख रुपये तक ऋण मिल सकेगा। रिपोर्ट के अनुसार, इन कदमों से बाजार में धन की उपलब्धता बढ़ेगी और खरीद-बिक्री गतिविधियों को बल मिलेगा।
दलालों पर सख्ती, ऋण महंगा होने के संकेत
रिपोर्ट में कहा गया है कि दलालों के लिए पूर्ण गारंटी और प्रतिभूतियों के मूल्य में कटौती जैसे प्रावधान उनके लिए ऋण महंगा बना सकते हैं। दूसरी ओर, आरबीआई ने सूचीबद्ध रियल एस्टेट निवेश न्यास और अवसंरचना निवेश न्यास को बैंक वित्तपोषण की अनुमति देने का प्रारूप भी जारी किया है। कम से कम तीन वर्ष पुराने और स्थिर नकदी प्रवाह वाले न्यास ही पात्र होंगे। इस पर 6 मार्च 2026 तक सुझाव मांगे गए हैं और अंतिम नियम 1 जुलाई 2026 से लागू होंगे।
रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि ये बदलाव कंपनियों को विस्तार और अधिग्रहण के लिए पूंजी उपलब्ध कराने में मदद करेंगे, साथ ही बैंकिंग तंत्र में जोखिम नियंत्रण भी सुनिश्चित करेंगे।