भुवनेश्वर : ओडिशा सरकार ने सोमवार को कहा कि जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार (खजाना) की सूची बनाने की पूरी तैयारी कर ली गई है और यह काम जल्द शुरू किया जाएगा।
सरकार का यह बयान उड़ीसा उच्च न्यायालय के हालिया निर्देश के बाद आया है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर रत्न भंडार में रखे आभूषण और अन्य कीमती सामान की लंबित सूची तैयार करने का आदेश दिया है।
मंदिर प्रशासन ने 17 जनवरी को फैसला किया था कि राज्य सरकार की मंजूरी मिलने के बाद नवीनीकृत रत्न भंडार में रखे गहनों और कीमती वस्तुओं की गिनती “शुभ दिन” से शुरू की जाएगी।
रत्न भंडार में दो कक्ष हैं भीतरी और बाहरी। बाहरी कक्ष रोजाना भगवान की सेवा के लिए खोला जाता है जबकि भीतरी कक्ष को 14 जुलाई 2024 को 46 साल बाद खोला गया था। इसका उद्देश्य सूची बनाना और ढांचे की मरम्मत करना था। इससे पहले गहनों की सूची 1978 में तैयार की गई थी।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने सोमवार को तैयारियों की समीक्षा की। मंदिर की प्रबंध समिति ने इस काम के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को पहले ही मंजूरी दे दी है। यह समिति 12वीं सदी के इस मंदिर की सर्वोच्च संस्था है जिसकी अध्यक्षता पुरी के गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव करते हैं।
अधिकारियों ने बताया कि इस बार तैयार की जाने वाली सूची का मिलान 1978 की सूची से किया जाएगा। साथ ही सभी गहनों और कीमती सामान की तस्वीरों के साथ डिजिटल कैटलॉग भी बनाया जाएगा। बैठक में खजाने की गिनती की प्रक्रिया, सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों पर विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक से पहले कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन के आवास पर वरिष्ठ अधिकारियों की प्रारंभिक बैठक हुई थी। कानून मंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि सूची बनाने की तारीख पर अंतिम फैसला मुख्यमंत्री लेंगे।
बैठक में उड़ीसा हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति बिस्वनाथ रथ भी शामिल हुए। वे रत्न भंडार को खोलने, मरम्मत और सूची बनाने की निगरानी के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति के अध्यक्ष हैं।
भीतरी कक्ष की मरम्मत और संरक्षण का काम भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने 95 दिनों और 333 कार्यकारी घंटे में पूरा किया।
इधर विपक्षी दल बीजू जनता दल (बीजेडी) ने राज्य की भाजपा सरकार पर राजनीति करने का आरोप लगाया है। पार्टी के प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने कहा कि भाजपा ने भगवान जगन्नाथ के नाम पर लोगों को गुमराह कर सत्ता हासिल की और रत्न भंडार की मरम्मत व सूची बनाने का वादा किया था लेकिन करीब 20 महीने बाद भी काम शुरू नहीं हुआ।
गौरतलब है कि 27 जनवरी को मुख्य न्यायाधीश हरीश टंडन और न्यायमूर्ति एम.एस. रमन की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर सूची तैयार करने का निर्देश दिया था।