डिग्री होने का बावजूद नौकरी नहीं। नौकरी की मांग पर सोमवार को पश्चिम बंगाल NIOS डीएलएड संग्राम मंच के समर्थक सड़क पर उतरे। सॉल्टलेक में विकास भवन अभियान का आह्वान किया गया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद उन्हें नौकरी नहीं दी गयी। इसलिए विरोध-प्रदर्शन किया गया। करुणामई में थाली बजाकर विरोध-प्रदर्शन किया गया।
करुणामई मोड़ से विकास भवन की ओर बढ़ने के लिए जैसे ही जुलूस आगे बढ़ा उसे पुलिस ने रोक दिया। बैरिकेड में फंसकर अभ्यर्थियों ने नारेबाजी शुरू कर दी। अभ्यर्थियों का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट ने 3 महीने के अंदर नियुक्त करने के लिए कहा था। सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी नहीं माना गया। अभ्यर्थियों का कहना है कि हम पिछले 9 सालों से सड़कों पर हैं। समस्या क्या है, यह हमारे सामने अभी भी स्पष्ट नहीं है लेकिन सभी राज्यों में नियुक्ति हो रही है। सिर्फ बंगाल में ही वंचित किया जा रहा है।
बता दें, NIOS की डिग्री उन लोगों के पास होती है, जिन्होंने दूरस्थ शिक्षा से डीएलएड की डिग्री हासिल की - नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग। प्राथमिक स्तर पर शिक्षकों की नियुक्ति के लिए दो सालों का डीएलएड डिग्री होना अनिवार्य होता है। कई अभ्यर्थी ओपेन स्कूल से डीएलएड करते हैं। यह 18 महीनों का कोर्स होता है। इस 18 महीने के कोर्स को लेकर ही मामला दायर किया गया था।
मीडिया से बात करते हुए एक अभ्यर्थी ने दावा करते हुए कहा कि हम वैध नियुक्ति के हकदार हैं। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि 1233 अभ्यर्थियों को 2022 की नियुक्ति प्रक्रिया के तहत नौकरी देनी होगी। इधर बेरोजगार भत्ता दिया जा रहा है। एमए, बीए पास करने वाले युवा लाइन में खड़े होकर भत्ता ले रहे हैं।
शिक्षित व मेहनतकश को नौकरी नहीं मिल रही है। बेरोजगार भत्ता दिया जा रहा है लेकिन नौकरी नहीं दी जा रही है। 1233 लोगों को नौकरी तो देनी ही होगी, इसके साथ ही NIOS उत्तीर्ण को नियमित तौर पर सम्मान के साथ इंटरव्यू लेकर नौकरी पर बहाल किया जाए, इसे भी सरकार को सुनिश्चित करना होगा।