कोलकाताः हुगली जलमार्ग परिवहन को और बेहतर बनाने के लिए इस बार राज्य सरकार ने अत्याधुनिक कैटामरन जहाज खरीदा है। राज्य परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अब हुगली नदी में जो सभी लांच चलती हैं, उनकी तुलना में इसकी गति बहुत अधिक होगी। ईंधन की खपत भी कम होगी। इतना ही नहीं, इस जलयान पर चढ़कर थोड़े ही समय में कोलकाता से हल्दिया, सुंदरबन या गंगासागर पहुँचना संभव होगा। निकट भविष्य में कोलकाता से मुर्शिदाबाद, नवद्वीप, मायापुर तक सफर के लिए कैटामरान सेवा शुरू करने का भी विचार है। इसके जरिये आने वाले दिनों में राज्य के पर्यटन क्षेत्र में तेजी आने की उम्मीद है, राज्य सचिवालय के अधिकारी ऐसा मान रहे हैं।
राज्य के परिवहन मंत्री स्नेहाशीष चक्रवर्ती ने कहा, 'नए प्रकार के जो कैटामरन जलयान खरीदे जा रहे हैं, वे अपेक्षाकृत कम वजन वाले स्टील से बनाए जाएंगे। इसलिए इसकी गति अधिक होगी। यात्रियों की सुविधा के लिए इसमें कुछ अतिरिक्त सुविधाएँ भी होंगी। हम कई नए घाट बना रहे हैं। इसके लिए नए जलयान खरीदने पड़ रहे हैं।'
परिवहन विभाग के सूत्रों से पता चला है कि कई करोड़ रुपये खर्च करके विभिन्न आकार के कैटामरन खरीदे जा रहे हैं। इनमें कुछ कैटामरन आकार में काफी बड़े हैं। उनमें लगभग 300 यात्री बैठ सकते हैं। ऐसे कुल 5 जलयान खरीदे जा रहे हैं। प्रत्येक की कीमत लगभग 4 करोड़ रुपये होगी। 100 यात्रियों का वहन करने वाले ऐसे कुल 10 कैटामरन जहाज खरीदे जा रहे हैं। इनकी औसत कीमत लगभग 2 करोड़ 60 लाख रुपये होगी। इसके अलावा, परिवहन विभाग ने पांच मोनोहल जलयान भी खरीदे हैं। इनमें 300 यात्री बैठ सकते हैं। प्रत्येक की अनुमानित कीमत लगभग 3 करोड़ 45 लाख रुपये है। कुल मिलाकर इसका खर्च लगभग 60–65 करोड़ रुपये होगा। इस्पात से बने ये सभी जलयान डीज़ल पर चलेंगे। नदी मार्ग के अलावा, ये तटीय क्षेत्रों में भी आसानी से यात्रा कर सकते हैं।
परिवहन विभाग के अधिकारियों का दावा है कि सामान्य लांच की तुलना में कैटामरन में यात्रा का समय आधा हो जाएगा। यात्रियों के लिए ये बहुत अधिक सुरक्षित होंगे। इसमें दो-दो इंजन होंगे। इसलिए बीच नदी में एक इंजन खराब होने पर भी किसी प्रकार का खतरा नहीं रहेगा। इसमें सेटेलाइट नेविगेशन की व्यवस्था होगी। यात्रियों के लिए आरामदायक सीट, बायो टॉयलेट और वातानुकूलन की सुविधा होगी। परिवहन विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, कैटामरन में आमतौर पर दो हॉल होते हैं। दो हॉल के बीच पानी स्वतंत्र रूप से बहता है। एक हॉल वाले जहाज की तुलना में ये अपेक्षाकृत अधिक स्थिर होते हैं। कैटामरन उथले पानी में भी चल सकते हैं।
सरकारी सूत्रों की खबर के अनुसार, वर्ल्ड बैंक के ऋण के पैसे से ये सभी जलयान खरीदे जाएंगे। इसके लिए हाल ही में टेंडर बुलाया गया है, परिवहन विभाग के अधीनस्थ संगठन 'वेस्ट बंगाल ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड' द्वारा। जलयान सेवा शुरू करने से पहले राज्य सरकार हुगली नदी जलमार्ग पर कुल 50 जेटी का निर्माण कर रही है, जहाँ अत्याधुनिक जलयान सहित आधुनिक गुणवत्ता वाले जलयान को ठहराया जा सकेगा।
हुगली नदी मार्ग पर कैटामरन सेवा बिल्कुल नई नहीं है। वाम सरकार के समय एक निजी संस्था के पहल पर कोलकाता और हल्दिया के बीच नियमित कैटामरण (सिल्वरजेट) सेवा शुरू हुई थी लेकिन इसमें यात्रियों की कमी के कारण वह सेवा बंद हो गई। कुछ साल पहले, एक संस्था के साथ साझेदारी करके कोलकाता–मायापुर के बीच कैटमरण सेवा शुरू की थी इस्कॉन ने। इसमें मुख्य रूप से पर्यटक ही यात्रा करते हैं।