ढाकाःउथल-पुथल भरे दौर में देश की बागडोर संभालने की जिम्मेदारी उठाने वाले मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में 18 महीने बीत चुके हैं। बांग्लादेश में कुल मिलाकर शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न हुए हैं। अब अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में यूनुस का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है। आगामी मंगलवार को तारिक रहमान के नेतृत्व में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की नई सरकार शपथ लेने जा रही है। इसके बाद यूनुस क्या करेंगे, इसे लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।
सत्ता परिवर्तन के माहौल में उनके भविष्य को लेकर राजनीतिक हलकों और सोशल मीडिया पर जोरदार अटकलें लगाई जा रही हैं। खबर है कि नई सरकार में उन्हें किसी महत्वपूर्ण संवैधानिक पद की जिम्मेदारी दी जा सकती है। मुख्य सलाहकार से वे देश के राष्ट्रपति भी बन सकते हैं।
सोशल मीडिया से लेकर कूटनीतिक हलकों तक यह चर्चा है कि यूनुस को नई सरकार का राष्ट्रपति बनाया जा सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी जो स्वीकार्यता है, वह बांग्लादेश की नई सरकार के लिए एक बड़ी कूटनीतिक पूंजी साबित हो सकती है।
एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर प्रख्यात स्तंभकार डेविड बर्गमैन ने भी इसी तरह की राय व्यक्त की है। उन्होंने लिखा कि इस समय बांग्लादेश को एक ऐसे प्रधानमंत्री की जरूरत है जो आंतरिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करे और एक ऐसे राष्ट्रपति की, जिसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत हो। उनके विचारों से यह स्पष्ट है कि वे यूनुस को राष्ट्रपति पद पर देखना चाहते हैं।
हालांकि इस विषय पर बीएनपी की ओर से कोई सीधा बयान नहीं आया है। बल्कि पार्टी ने अटकलों को बनाए रखा है। समाचार माध्यम एनडीटीवू को दिए साक्षात्कार में तारिक रहमान के अंतरराष्ट्रीय मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने कहा कि देश के भविष्य के निर्माण के लिए सक्षम और प्रतिभाशाली लोगों की सलाह लेने में तारिक रहमान रुचि रखते हैं।
उन्होंने कहा, “अब तक किसी विशेष व्यक्ति को किसी विशेष पद देने को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है। तारिक रहमान समावेशी शासन प्रणाली में विश्वास रखते हैं और सरकार संचालन में देश की सभी प्रतिभाओं का उपयोग करना चाहते हैं।”
कबीर ने यह भी बताया कि उपयुक्त समय पर देश के प्रतिष्ठित नागरिकों से परामर्श किया जाएगा और इस प्रक्रिया में यूनुस से चर्चा होना स्वाभाविक है। उनके अनुसार, “किसी की दक्षता, अनुभव और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा देश के लिए कई तरीकों से उपयोगी हो सकती है।”
हालांकि यूनुस के प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने सभी अटकलों को खारिज कर दिया है। एनडीटीवी से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट कहा, “मुख्य सलाहकार के रूप में कार्यकाल समाप्त होने के बाद सर की योजना अपने पुराने कार्यों में लौटने की है। राजनीति या किसी संवैधानिक पद में उनकी कोई रुचि नहीं है।”
शफीकुल ने कई समाचार माध्यमों को बताया कि यूनूस अपनी ‘थ्री ज़ीरो’ अवधारणा-शून्य गरीबी, शून्य बेरोजगारी और शून्य कार्बन उत्सर्जन को विश्वभर में प्रचारित करना चाहते हैं। वे नए सामाजिक व्यवसाय स्थापित करना चाहते हैं और युवाओं के साथ काम करने में रुचि रखते हैं।
हालांकि जवाहर लाल नेहरूयूनिवर्सिटी (जेएनयू) के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज़ के प्रोफेसर राजन कुमार का मानना है कि यूनुस पूरी तरह से राजनीतिक परिदृश्य से गायब नहीं होंगे। उन्होंने दटाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि शेख हसीना के शासनकाल में यूनुस के खिलाफ जो मामले दर्ज थे, उन्हें नई बीएनपी सरकार दोबारा सक्रिय करने की कोशिश नहीं करेगी क्योंकि वे बीएनपी के ‘एंटी-हसीना’ गठबंधन के साथ सामंजस्य रखते हैं। प्रोफेसर राजन कुमार के अनुसार, नई सरकार में यूनुस को किसी न किसी भूमिका में देखा जा सकता है-संभवतः औपचारिक या अनौपचारिक रूप से आर्थिक सलाहकार के रूप में।
अब सत्ता हस्तांतरण के बाद यूनुस स्वयं अपने भविष्य को लेकर क्या संदेश देते हैं, इस पर सबकी नजर टिकी हुई है।