नई दिल्लीःउत्पादक व्यय को अपनी सरकार की पहचान बताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि हाल ही में प्रस्तुत केंद्रीय बजट ने जानबूझकर अल्पकालिक लोकलुभावन उपायों से परहेज किया है और इसके बजाय बुनियादी ढांचे पर रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय के माध्यम से रोजगार और सतत विकास को गति देने पर जोर दिया है।
पीटीआई को दिए एक विशेष साक्षात्कार में मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने अपने कार्यकाल के वर्षों का उपयोग पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा छोड़ी गई संरचनात्मक कमियों को दूर करने, साहसिक सुधारों को आगे बढ़ाने और विकसित भारत की नींव रखने में किया है। नवीनतम बजट इस यात्रा का अगला चरण है।
1 अप्रैल से शुरू होने वाले वित्त वर्ष के बजट को अपनी शासन शैली का प्रतिबिंब बताते हुए मोदी ने कहा कि यह दस्तावेज हमारी शासन शैली और प्राथमिकताओं का सशक्त प्रतिबिंब है। यह बजट इस यात्रा के अगले स्तर का प्रतिनिधित्व करता है और हमारी रिफॉर्म एक्सप्रेस को नई गति देता है। इसे इस प्रकार तैयार किया गया है कि यह रफ्तार को तेज करे और हमारे युवाओं को तेजी से बदलती दुनिया के अवसरों के लिए तैयार करे। पूंजी संचयन, श्रम का औपचारिकरण और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना ने मिलकर भारत की संभावित विकास दर को 7 प्रतिशत तक पहुंचा दिया है।
लिखित साक्षात्कार में उन्होंने कहा, “उत्पादक व्यय हमारी सरकार की पहचान रहा है। उच्च पूंजीगत व्यय बुनियादी ढांचे और पूंजी निवेश पर हमारे फोकस को दर्शाता है, जो दीर्घकालिक विकास के सशक्त इंजन हैं।”
वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है-जो 2013 की तुलना में पांच गुना वृद्धि है। मोदी सरकार ने दीर्घकालिक विकास को गति देने के लिए अवसंरचना निर्माण, लॉजिस्टिक्स विस्तार और उभरते क्षेत्रों में निवेश को प्राथमिकता देने की अपनी रणनीति को और मजबूत किया है। रेल, सड़क, डिजिटल और ऊर्जा अवसंरचना पर खर्च के साथ-साथ अनुपालन को आसान बनाने और ऋण प्रवाह में सुधार के उपायों पर भी जोर दिया गया है, जिन्हें रोजगार सृजन और आर्थिक गति का मुख्य आधार माना गया है।
मोदी ने कहा, “यह उत्पादकता, रोजगार और भविष्य की आर्थिक क्षमता उत्पन्न करने वाली परिसंपत्तियों में निवेश करने का एक सचेत रणनीतिक निर्णय है, न कि अल्पकालिक लोकलुभावन उपायों का। इससे स्पष्ट है कि हमारा ध्यान लोगों के जीवन की गुणवत्ता सुधारने, युवाओं के लिए रोजगार सृजित करने और विकसित भारत की दिशा में राष्ट्र की प्रगति को आगे बढ़ाने पर है। लंबे समय तक उच्च गुणवत्ता वाले अवसंरचना की उपेक्षा की गई, जिससे आम लोगों और भारतीय व्यवसायों को चुनौतियों का सामना करना पड़ा। टूटी-फूटी और पुरानी अवसंरचना का उस राष्ट्र में कोई स्थान नहीं है जो विकसित भारत का सपना देखता है। सरकार ने गति, पैमाने और अगली पीढ़ी की अवसंरचना निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर इस क्षेत्र में क्रांति लाई है, साथ ही मौजूदा ढांचे का उन्नयन भी किया है। पिछले एक दशक में भारत ने अपने इतिहास में संभवतः सबसे व्यापक अवसंरचना निर्माण अभियान देखा है, जिसमें गुणवत्ता पर अभूतपूर्व जोर दिया गया है। हवाई अड्डों की संख्या दोगुनी हो गई है और हजारों विमानों के ऑर्डर दिए गए हैं; मेट्रो सेवाओं वाले शहरों की संख्या चार गुना से अधिक हो गई है; ग्रामीण सड़कों और इंटरनेट कनेक्टिविटी का तेजी से विस्तार हुआ है तथा माल गलियारों, बंदरगाहों और तटीय संपर्क के विस्तार में परिवर्तनकारी निवेश किए गए हैं।
क्षेत्रवार आवंटन पर उन्होंने कहा कि भारतीय रेलवे के लिए लगभग 3 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत प्रावधान किया गया है, जिसमें उच्च गति संपर्क, माल क्षमता और यात्री सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने का प्रस्ताव है, जिनमें दक्षिण हाई-स्पीड डायमंड कॉरिडोर भी शामिल है, जिससे कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी को विशेष लाभ होगा। समर्पित माल गलियारों का विस्तार कर यात्री मार्गों पर भीड़ कम करने और उद्योग के लिए लॉजिस्टिक्स लागत घटाने का प्रयास किया जा रहा है। राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए आवंटन एक दशक पहले की तुलना में लगभग 500 प्रतिशत बढ़ गया है। बायोफार्मा, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट निर्माण, रेयर अर्थ कॉरिडोर और केमिकल पार्क जैसे क्षेत्रों में निवेश किया जा रहा है। ये रोजगार और निवेश को नई गति देंगे और भारत के भविष्य को मजबूत करेंगे।
शासन सुधारों पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “इस बजट की एक महत्वपूर्ण विशेषता भरोसा-आधारित शासन पर हमारा निरंतर बल है। विभिन्न क्षेत्रों, मंत्रालयों और प्रक्रियाओं में हम कागजी कार्रवाई को बड़े पैमाने पर कम कर रहे हैं, अनुपालन आवश्यकताओं को घटा रहे हैं। हम राज्य को एक सक्षमकर्ता के रूप में देखते हैं और नागरिकों पर भरोसा करते हैं। इसका लोगों के जीवन पर सामान्य बजट आंकड़ों से कहीं अधिक गहरा प्रभाव पड़ेगा।”
मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने समावेशी, तकनीक-आधारित लेकिन मानवीय दृष्टिकोण वाला कल्याणकारी ढांचा तैयार किया है, जो अंतिम व्यक्ति तक पहुंचता है और किसी को पीछे नहीं छोड़ता, तथा राष्ट्र निर्माण और आर्थिक सुदृढ़ीकरण इसके मार्गदर्शक सिद्धांत हैं।
लाल किले से दिए अपने आह्वान ‘यही समय है, सही समय है’ को याद करते हुए उन्होंने कहा कि यह तात्कालिकता की भावना अब “राष्ट्रीय संकल्प” बन चुकी है। इसे केवल बजट 2026 के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह 21वीं सदी की दूसरी तिमाही का पहला बजट है। यह बजट 2014 से प्राप्त उपलब्धियों को सुदृढ़ करता है और अगले 25 वर्षों के लिए गति प्रदान करता है। जैसे 1920 के दशक में लिए गए निर्णयों और पहलों ने 1947 में स्वतंत्रता की नींव रखी, वैसे ही आज हम जो निर्णय ले रहे हैं, वे 2047 तक विकसित भारत की नींव रख रहे हैं।