नई दिल्ली: संसद में बजट सत्र का पहला चरण शुक्रवार को समाप्त हो गया। दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होगा। तृणमूल सूत्रों के अनुसार इसी चरण में राज्यसभा में मनरेगा के तहत पश्चिम बंगाल के 52 हजार करोड़ रुपये के बकाया भुगतान का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाने की योजना बनाई गई है।
माना जा रहा है कि दूसरे चरण के दौरान पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का माहौल भी चरम पर होगा। पिछले गुरुवार राज्यसभा की बिज़नेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक में तय हुआ कि इस चरण में उच्च सदन में ‘डिमांड फॉर ग्रांट्स’ पर बहस के दौरान ग्रामीण विकास मंत्रालय के साथ पर्यावरण मंत्रालय पर भी चर्चा होगी। इसके बाद तृणमूल ने प्रारंभिक तौर पर निर्णय लिया है कि ग्रामीण विकास मंत्रालय पर चर्चा के समय पार्टी के सांसद मुख्य रूप से 52 हजार करोड़ रुपये के बकाया का मुद्दा उठाएंगे।
लंबे समय से तृणमूल इस बकाये की मांग उठा रही है, लेकिन मोदी सरकार ने इस पर एक शब्द भी नहीं कहा है। आम बजट में भी इसका कोई उल्लेख नहीं है। नया ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम ‘वीबी जी रामजी’ लागू होने से पहले पुरानी मनरेगा योजना जारी रहने की जानकारी केंद्र पहले ही दे चुका है। मनरेगा मद में 36,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, लेकिन उसमें पश्चिम बंगाल के हिस्से का कोई जिक्र नहीं है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मनरेगा में ‘बंगाल की उपेक्षा’ के मुद्दे पर संसदीय विरोध से राजनीतिक लाभ मिलने की उम्मीद तृणमूल खेमे को है।
पिछले शुक्रवार बजट सत्र के पहले चरण के अंतिम दिन केंद्रीय बजट में अल्पसंख्यकों की उपेक्षा और उच्च सदन में महत्वपूर्ण मंत्रालयों के कामकाज पर चर्चा की मांग को लेकर तृणमूल सहित विपक्षी दलों ने केंद्र के खिलाफ आवाज उठाई। राज्यसभा में तृणमूल के नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने आरोप लगाया कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के लगभग 85 मिनट के बजट भाषण में धार्मिक, सामाजिक या भाषाई अल्पसंख्यक समुदायों का कोई उल्लेख नहीं था। ‘माइनॉरिटी’ शब्द का प्रयोग केवल एक बार हुआ, वह भी ‘माइनॉरिटी शेयरहोल्डर’ के संदर्भ में। तृणमूल के सुर में सुर मिलाते हुए विपक्ष का आरोप है कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) लंबे समय से लगभग निष्क्रिय पड़ा है।