पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के मतदाता सूची के मसौदा से करीब 58 लाख मतदाताओं का नाम हटाया गया था। 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। चुनाव आयोग सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार अंतिम मतदाता सूची से लगभग 11 लाख और मतदाताओं का नाम निश्चित रूप से हटेगा। संभावना जतायी जा रही है कि यह संख्या अगले कुछ दिनों में और बढ़ सकती है।
आज शनिवार को पश्चिम बंगाल में SIR की सुनवाई की प्रक्रिया खत्म होने वाली है। हालांकि जिला चुनाव अधिकारी (DEO) ने चुनाव आयोग की फुल बेंच के सामने वर्चुअल बैठक में दावा किया है कि शुक्रवार को ही सुनवाई की प्रक्रिया खत्म हो गयी है। अब 21 फरवरी तक सुनवाई के दौरान प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों की जांच और उनका निपटारा किया जाएगा। इसी दौरान स्क्रुटनी की प्रक्रिया भी सम्पन्न की जाएगी। इसके एक सप्ताह बाद ही अंतिम मतदाता सूची जारी होने वाली है।
आयोग सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मतदाता सूची के मसौदा से 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' और 'अनमैप्ड मतदाताओं' के तौर पर लगभग 1 करोड़ 51 लाख 92 हजार 735 लोगों की पहचान की गयी है। इनमें से बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) 3 लाख 55 हजार 679 लोगों तक नोटिस ही नहीं पहुंचा पाए क्योंकि इनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। इसके अलावा 6 लाख 20 हजार मतदाता सुनवाई का नोटिस मिलने के बावजूद सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं हुए।
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) मनोज कुमार अग्रवाल ने बताया कि सुनवाई के बाद 1 करोड़ 23 लाख से अधिक दस्तावेजों की जांच शुरू हो चुकी है। अभी भी 5 प्रतिशत दस्तावेज ERO यानी सिस्टम में अपलोड नहीं हुआ है। लेकिन प्राथमिक तौर पर जांच के बाद 1 लाख 40 हजार मतदाताओं को 'अयोग्य' चिह्नित किया गया है।
उन्होंने आगे बताया कि 'अनमैप्ड' मतदाताओं का नाम सूची में रखने के लिए जो फॉर्म वितरित किया जा रहा है, वह फर्जी है। अगर किसी ने इस फॉर्म के आधार पर आवेदन किया तो उसे अस्वीकार कर दिया जाएगा। ERO-AERO अगर इस काम में शामिल होते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
CEO ने कहा कि अगर 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद जिनका नाम हट गया है, अगर उन्हें अपना नाम मतदाता सूची में शामिल करवाना है तो वे संबंधित DEO के पास 5 दिनों के अंदर पुनर्विचार के लिए आवेदन कर सकते हैं। वहां भी आवेदन रद्द होने पर 5 दिनों के अंदर CEO के पास आवेदन कर सकेंगे। क्यों नाम हटाया गया इसका स्पष्ट उल्लेख करते हुए चुनाव आयोग की ओर से उन्हें पत्र भेजा जाएगा।