🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

बतौर दस्तावेज अपलोड हुए समाचारपत्रों की कटिंग व खाली पन्ने! कई DEO को पड़ी चुनाव आयोग की फटकार

'किसी भी कीमत पर विदेशी मतदाताओं का नाम अंतिम मतदाता सूची में नहीं होना चाहिए।,' चुनाव आयोग

By Shubhrajit Chakraborty, Posted By : Moumita Bhattacharya

Feb 14, 2026 10:26 IST

आज (शनिवार) को राज्य में SIR की सुनवाई की प्रक्रिया खत्म हो रही है। उससे पहले शुक्रवार को राष्ट्रीय चुनाव आयोग ने वीडियो कॉन्फ्रेंस बैठक की। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार दक्षिण 24 परगना के जिलाधिकारी को चुनाव आयोग की नाराजगी झेलनी पड़ी। जिन जिलाधिकारियों को चुनाव आयोग के गुस्से का सामना करना पड़ा उनमें सिर्फ दक्षिण 24 परगना ही नहीं बल्कि कूचबिहार, मालदह, जलपाईगुड़ी, उत्तर 24 परगना, पूर्व मिदनापुर भी शामिल हैं।

क्यों झेलनी पड़ी नाराजगी?

चुनाव आयोग सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दक्षिण 24 परगना जिले में अभी तक सुनवाई का काम पूरा नहीं हुआ है। क्यों? मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच में भी कई तरह की लापरवाही क्यों बरती गयी? वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने ये सवाल उठाए। इसके साथ ही बैठक में स्पष्ट आदेश दिया कि किसी भी कीमत पर विदेशी मतदाताओं का नाम अंतिम मतदाता सूची में नहीं होना चाहिए।

बैठक में कौन से मामलों में गलतियां पकड़ी गयी?

* समाचार पत्रों की कटिंग, खाली पृष्ठ, अस्पष्ट फोटो आदि दस्तावेजों को अपलोड करने के कई मामले सामने आए। इन्हें पावरप्वाएंट के माध्यम से जिलाधिकारियों और केंद्रीय पर्यवेक्षकों को दिखाया गया। चुनाव आयुक्त ने सवाल पूछा कि इन दस्तावेजों को कैसे अपलोड कर दिया गया, किसने अपलोड किया और जिलाधिकारियों ने इनकी जांच क्यों नहीं की?

* अब क्यों नए दस्तावेजों को अपलोड किया जा रहा है? मुख्य चुनाव आयुक्त ने यह सवाल भी उठाया। फर्जी या नया बनाए गए दस्तावेजों को अपलोड किया जा रहा है या नहीं, उन्होंने जिलाधिकारियों से इसे सुनिश्चित करने के लिए कहा। चुनाव आयोग व सुप्रीम कोर्ट ने जिन दस्तावेजों का अनुमोदन दिया है, सिर्फ उन्हीं दस्तावेजों के बारे में ERO/AERO विचार करेंगे, इसे भी व्यक्तिगत तौर पर सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी जिलाधिकारियों की होगी।

* सोमवार, 16 फरवरी 2026 की शाम 5 बजे तक सभी DEO को सुनिश्चित करना होगा कि अपलोड होने वाले प्रत्येक दस्तावेज अनुमोदित सूची से ही हो। आईटी टीम को हिदायत दी गयी है कि समयसीमा के बाद सिस्टम में ऐसा कोई दस्तावेज है या नहीं, इसकी जांच करें। निर्धारित समय के बाद अगर एक भी दस्तावेज पकड़ा जाता है तो संबंधित जिलाधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होगा।

* DEO, ERO और AERO को चेताते हुए कहा गया है कि प्रत्येक दस्तावेज और फैसला अगले कई सालों तक सिस्टम में सुरक्षित रहेगा। भविष्य में 1, 2 अथवा 5 साल बाद अगर किसी मतदाता की पहचान विदेशी के तौर पर निकलती है तो ऐसे मामले में संबंधित जिलाधिकारी को सवालों का जवाब देना पड़ेगा।

मिली जानकारी के अनुसार राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल को भी निर्देश दिया गया है कि ऐसे दस्तावेज जो स्वीकार करने योग्य नहीं है या अस्पष्ट हैं उन मामलों की जांच की जाए और सीधे चुनाव आयोग के पास भेजना होगा। ताकि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकें।

शुक्रवार को इस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान राज्य के मुख्य चुनाव आयुक्त मनोज कुमार अग्रवाल के साथ ही राज्य के स्पेशल रोल ऑब्जर्वर सुब्रत गुप्त समेत अन्य इलेक्टोरल रोल ऑब्जर्वर भी मौजूद रहे। इसके साथ ही प्रत्येक जिले के जिलाधिकारी व राज्य CEO ऑफिस के उच्चाधिकारी भी इस बैठक में उपस्थित थे।

Prev Article
SIR में और 1 लाख 40 हजार मतदाताओं के नाम कट सकते हैं, दस्तावेज़ों की जांच के दौरान आयोग ने बताया
Next Article
दूसरी बार बम की चेतावनी, इंडिगो फ्लाइट के बाथरूम में लिपस्टिक से लिखा था मैसेज

Articles you may like: