कोलकाता : SIR के काम में लापरवाही के आरोप में रविवार को ही चुनाव आयोग ने राज्य के सात अधिकारियों को निलंबित करने का निर्देश दिया था। दावा किया गया कि इन सातों अधिकारियों ने SIR की गाइडलाइन का उल्लंघन किया है। सोमवार को आयोग ने स्पष्ट किया कि उन्हें सिर्फ SIR के काम से नहीं बल्कि सरकारी सेवा से ही निलंबित किया गया है। आयोग के अनुसार 9 राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों में चल रहे SIR अभियान के बीच केवल पश्चिम बंगाल में यह अभूतपूर्व फैसला लिया गया है।
रविवार को जिन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई उनमें कैनिंग पूर्व के AERO सत्यजीत दास (जॉइंट बीडीओ), जॉयदीप कुंडू, मयनागुड़ी की AERO डालिया रायचौधुरी, सूती के AERO शेख मुर्शिद आलम, फरक्का के AERO नीतिश दास और समशेरगंज के AERO सियाफुर रहमान शामिल हैं। इन सभी को निलंबित करने के संबंध में आयोग ने राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को पत्र भेजा था।
आयोग का कहना है कि SIR कार्य में लापरवाही, अनियमितता और अधिकारों के दुरुपयोग के आरोप सामने आने के बाद माइक्रो ऑब्जर्वरों ने इन अधिकारियों को कई बार चेतावनी दी लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने बताया कि वर्ष 2000 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार चुनाव आयोग चाहे तो स्वयं संज्ञान लेकर राज्य के अधिकारियों को निलंबित कर सकता है।
इधर सोमवार सुबह आयोग ने राज्य के CEO कार्यालय को पत्र लिखकर कहा कि SIR के दस्तावेज के रूप में ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ या ‘बांग्लार बाड़ी योजना’ की स्वीकृति पत्र मान्य नहीं होगी। ऐसे में केवल आवास योजना के दस्तावेज जमा करने वाले मतदाताओं के नाम अंतिम मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे।
हालांकि यदि किसी मतदाता ने आवास योजना के कागजों के साथ चुनाव आयोग की सूची में शामिल अन्य वैध दस्तावेज भी जमा किए हैं तो उन्हें स्वीकार किया जाएगा। यदि किसी ERO ने ऐसे दस्तावेज अपलोड नहीं किए हों और यह साबित हो जाए तो संबंधित ERO के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आयोग ने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम हटेंगे वे पहले DEO और फिर CEO के पास आवेदन कर नए दस्तावेज देकर अपना नाम दोबारा जुड़वा सकते हैं।