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SIR की सुनवाई खत्म होने के बाद चुनाव आयोग का नया निर्देश, अब यह दस्तावेज हुआ अस्वीकृत!

जिन लोगों ने SIR में बतौर दस्तावेज 'प्रधानमंत्री आवास योजना' व 'बांग्लार बाड़ी' परियोजना में आर्थिक सहायता का अनुमोदन पत्र दिया है, उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।

By Debdeep Chakraborty, Posted By : Moumita Bhattacharya

Feb 16, 2026 16:51 IST

राज्य में SIR की सुनवाई की प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है। जिन लोगों को सुनवाई के लिए बुलाया गया था उनके दस्तावेजों की जांच और सत्यापन का काम चल रहा है। इस बीच दस्तावेजों को लेकर चुनाव आयोग ने एक नई विज्ञप्ति जारी की है। इस विज्ञप्ति में कहा गया है कि जिन लोगों ने SIR में बतौर दस्तावेज 'प्रधानमंत्री आवास योजना' व 'बांग्लार बाड़ी' परियोजना में आर्थिक सहायता का अनुमोदन पत्र दिया है, उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।

सोमवार को राज्य के CEO ऑफिस को चुनाव आयोग ने एक पत्र भेजा। इस पत्र में कहा गया है कि उपरोक्त परियोजनाओं के दस्तावेजों को SIR में दस्तावेज के तौर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। सुनवाई के दौरान कई मतदाताओं ने इस तरह के दस्तावेज जमा किए थे।

इस मामले को लेकर उलझन पैदा होने पर चुनाव आयोग से राज्य के CEO ऑफिस ने स्पष्टिकरण की मांग की थी। चुनाव आयोग ने इस मामले में पत्र लिखकर यह स्पष्ट कर दिया कि PMAY-G, IAY, बांग्लार बाड़ी (ग्रामीण) परियोजनाओं के दस्तावेज SIR में स्वीकार नहीं की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहा गया था कि 27 अक्टूबर 2025 को SIR संबंधित जो नोटिस जारी की गयी थी उसमें कहा गया था कि उल्लेखित दस्तावेज चुनाव आयोग के पास स्वीकार करने योग्य होगा। हालांकि इस विज्ञप्ति की सूची में जमीन या घर एलॉटमेंट के दस्तावेज को स्वीकार करने की बात कही गयी थी। कई लोगों ने इसे गलत समझते हुए सरकारी आवास परियोजना का दस्तावेज जमा कर दिया है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया कि इस तरह के दस्तावेज SIR की स्क्रुटनी प्रक्रिया के दौरान स्वीकार नहीं किया जाएगा।

इस विषय को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने विरोध जताना शुरू कर दिया है। तृणमूल द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि गत 21 जनवरी 2026 को जब इन परियोजनाओं के दस्तावेज स्वीकार किए जाएंगे या नहीं, यह सवाल पूछा गया था तब चुनाव आयोग ने अपना रूख क्यों स्पष्ट नहीं किया था? लगभग 1 महीने से यह नाटक क्यों कर रहे हैं?

क्या ये लोग सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी नहीं मानेंगे? बड़ी संख्या में आवेदकों ने इस परियोजना के उपभोक्ता के तौर पर मिले कार्ड और अनुमोदनपत्र को जमा दिया है। अब उनका क्या भविष्य होगा? देश के दूसरे राज्य में एक नियम और बंगाल में अलग नियम क्यों होगा?

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