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MSME को समय पर क्रेडिट पहुंचाना RBI की शीर्ष प्राथमिकता: गवर्नर संजय मल्होत्रा

गवर्नर ने औपचारिक व्यवसाय और डिजिटल भुगतान अपनाने पर जोर दिया। MSME सेक्टर GDP, निर्यात और रोजगार में अहम योगदान देता है।

By श्वेता सिंह

Feb 16, 2026 18:48 IST

मुंबईः भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने सोमवार को कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए समय पर और पर्याप्त औपचारिक क्रेडिट उपलब्ध कराना RBI की प्रमुख नीति प्राथमिकताओं में शामिल है।

RBI के बयान के अनुसार, गवर्नर ने कुछ चुनिंदा MSME और MSME एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इस अवसर पर उन्होंने एमएसएमई सेक्टर की भारत की अर्थव्यवस्था में भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि MSME GDP, निर्यात और रोजगार के लिए अहम योगदान देते हैं। इसके विकास के लिए क्रेडिट का सही समय पर उपलब्ध होना आवश्यक है।

बैठक में गवर्नर ने बताया कि केंद्रीय बैंक और केंद्र सरकार द्वारा MSME सेक्टर को मदद देने के लिए कई नीति और नियामकीय उपाय लागू किए गए हैं। उन्होंने उद्यमियों को विशेष रूप से सलाह दी कि वे अपने व्यवसाय को औपचारिक रूप में लाएं, जिससे वित्तीय लेन-देन आसान और पारदर्शी हो। क्रेडिट अनुशासन (credit discipline) बनाए रखें ताकि भविष्य में उन्हें अधिक वित्तीय अवसर मिलें। डिजिटल भुगतान अपनाएं, जिससे व्यवसाय लंबी अवधि में मजबूत और प्रतिस्पर्धी बने। गवर्नर ने यह भी कहा कि ऐसे कदम MSME को न केवल वित्तीय सुरक्षा देंगे बल्कि उनकी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता भी बढ़ाएंगे।

बैठक के दौरान उपस्थित MSME और एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों ने क्रेडिट उपलब्धता, नीति नियम और संचालन संबंधी चुनौतियों पर अपने विचार और सुझाव साझा किए। उन्होंने कहा कि कई बार बैंकों से समय पर लोन मिलना मुश्किल होता है और बैंकिंग प्रक्रिया को सरल बनाने की आवश्यकता है।

गवर्नर ने उनकी प्रतिक्रियाओं को ध्यान से सुना और कहा कि RBI लगातार इस क्षेत्र में सुधार के लिए काम कर रहा है और MSME के साथ संवाद बनाए रखेगा। बैठक में RBI के उप-गवर्नर टी रबी शंकर, जे स्वामीनाथन, और एससी मुर्मू भी मौजूद रहे।

विशेषज्ञों का कहना है कि RBI की यह पहल MSME सेक्टर के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। ऐसा इसलिए कि वित्तीय समावेशन और आसान क्रेडिट प्रवाह छोटे और मध्यम व्यवसायों की वृद्धि और रोजगार सृजन के लिए आधारशिला हैं। डिजिटल भुगतान और औपचारिक व्यवसाय अपनाने से उद्यमियों की लोन तक पहुंच बेहतर होगी और वित्तीय जोखिम भी कम होंगे।

RBI की यह नीति संकेत देती है कि बैंकिंग प्रणाली अब केवल बड़े व्यवसायों तक सीमित नहीं रहेगी। MSME को भी समय पर और पर्याप्त वित्तीय सहायता देने के लिए सतत प्रयास किए जाएंगे।

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