नई दिल्ली : भारत और अमेरिका के व्यापार समीकरण में अब बड़ा धमाका! केवल समझौते अब केवल फाइलों में बंद नहीं होंगे, बल्कि दोनों देशों की दोस्ती अब सीधे तौर पर भारत की आम जनता की रसोई से लेकर भारी उद्योग के पहियों तक दिखाई देने वाली है। शनिवार को केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने साफ कर दिया कि 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का जो सपना देखा जा रहा है, उसकी असली ताकत सस्ता तेल और अमेरिका की उन्नत तकनीक होगी।
इस अंतरिम व्यापार समझौते के जरिये भारत अब वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों पर सौदेबाजी की एक अजेय क्षमता हासिल करने जा रहा है। अमेरिका से कच्चा तेल, एलएनजी और एलपीजी अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर आयात करने का रास्ता साफ होने से देश की बढ़ती 7 प्रतिशत वार्षिक ऊर्जा मांग को पूरा करना अब सिर्फ समय की बात है। अमेरिकी प्रशासन द्वारा भारतीय उत्पादों पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर सीधे 18 प्रतिशत करने से भारतीय निर्यातकों की लॉटरी लग गई है।
इसके बदले में भारत भी अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों तथा कृषि और खाद्य उत्पादों पर से शुल्क का बोझ हटा रहा है। खासकर देश के इस्पात उद्योग को एक नई ऊंचाई पर ले जाने की तैयारी है। सालाना 14 करोड़ टन इस्पात उत्पादन को दोगुना करने के लक्ष्य के लिए भारी मात्रा में कोकिंग कोल की जरूरत होगी। फिलहाल कुछ ही देशों पर निर्भर रहकर डेढ़ लाख करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं, लेकिन अमेरिका के साथ यह साझेदारी लागत घटाने और आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद करेगी।
मंत्री का दावा है कि सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भी यह समझौता जादू की तरह काम करेगा। वर्तमान में 18 लाख करोड़ रुपये के आईटी निर्यात को 45 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने के लिए अमेरिका की उन्नत डेटा सेंटर तकनीक और वितरण प्रणाली भारत का तुरुप का इक्का साबित होगी। कुल मिलाकर वॉशिंगटन और दिल्ली की यह नई केमिस्ट्री विश्व अर्थव्यवस्था के नक्शे पर भारत को एक मजबूत स्थान पर पहुंचाएगी, ऐसा विशेषज्ञों के एक वर्ग का मानना है।