नई दिल्ली: नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में आयोजित ग्लोबल बिजनेस समिट 2026 में दावा किया कि भारत आज वैश्विक आर्थिक वृद्धि (ग्लोबल ग्रोथ) में 16 प्रतिशत से अधिक योगदान दे रहा है। आने वाले वर्षों में यह दुनिया की अर्थव्यवस्था का “नया इंजन” बनेगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत खुद को तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर बता रहा है।
11वीं से तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की ओर
प्रधानमंत्री ने कहा कि एक दशक पहले भारत दुनिया की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था और कई वैश्विक चुनौतियों-कोविड महामारी, सप्लाई चेन संकट और भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। उनके अनुसार, संकट के समय ही किसी देश की असली क्षमता सामने आती है और भारत ने इस दौर में “शानदार डिलीवरी” दी है।
यह दावा इस व्यापक नैरेटिव का हिस्सा है जिसमें भारत खुद को वैश्विक अस्थिरता के बीच एक स्थिर और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में पेश कर रहा है।
‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ और नीतियों में बदलाव
मोदी ने 21वीं सदी के इस दशक को भारत के लिए “रिफॉर्म एक्सप्रेस” का दौर बताया। उनका कहना था कि सुधार मजबूरी में नहीं, बल्कि स्पष्ट विजन और कमिटमेंट के साथ किए जा रहे हैं।
उन्होंने इशारों-इशारों में पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले “पॉलिसी पैरालिसिस”, भ्रष्टाचार और घोटालों के कारण भारत पर वैश्विक भरोसा कम था, जिससे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) आगे नहीं बढ़ पाए। अब भारत कई देशों के साथ व्यापार समझौते कर रहा है क्योंकि वह आत्मविश्वास से भरा है और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार है।
16% ग्लोबल ग्रोथ- इन आंकड़ों का क्या है अर्थ?
भारत का 16% वैश्विक वृद्धि में योगदान बताता है कि वैश्विक जीडीपी में होने वाली कुल वृद्धि का बड़ा हिस्सा भारत से आ रहा है। यह मुख्यतः उच्च विकास दर, मजबूत घरेलू मांग, डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार और बुनियादी ढांचे में निवेश का परिणाम माना जा रहा है।
हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि इस दावे की असली परीक्षा तीन मोर्चों पर होगी:
पहला, रोजगार सृजन – क्या तेज विकास पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नौकरियां पैदा कर पा रहा है?
दूसरा, निर्यात प्रतिस्पर्धा – क्या भारत वैश्विक सप्लाई चेन में स्थायी जगह बना पा रहा है?
और तीसरा, निजी निवेश – क्या सरकारी कैपेक्स के साथ निजी सेक्टर का निवेश भी गति पकड़ रहा है?
बजट और कैपेक्स पर जोर
प्रधानमंत्री ने 1 फरवरी को पेश किए गए यूनियन बजट का हवाला देते हुए कहा कि कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) को बढ़ाकर करीब 17 लाख करोड़ रुपये किया गया है। उनका दावा है कि इससे देश की उत्पादक क्षमता बढ़ेगी और कई सेक्टरों में रोजगार पैदा होंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने बजट को “आउटकम-सेंट्रिक” बनाया है-यानी सिर्फ कितना पैसा खर्च हुआ, यह नहीं बल्कि उससे क्या परिणाम निकले, इस पर ध्यान दिया जा रहा है।
क्या भारत बनेगा नया ‘ग्लोबल इंजन’?
भारत की मजबूत विकास दर, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, विनिर्माण पर फोकस और वैश्विक साझेदारियों का विस्तार उसे एक अहम वैश्विक खिलाड़ी बना रहा है। लेकिन “दुनिया की इकॉनमी का इंजन” बनने का दावा तभी स्थायी होगा जब विकास समावेशी हो, रोजगार सृजन तेज हो और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच स्थिरता बनी रहे।
फिलहाल, सरकार का संदेश साफ है-भारत सिर्फ वैश्विक बदलावों का दर्शक नहीं, बल्कि आने वाले दशक में वैश्विक आर्थिक दिशा तय करने वाला प्रमुख देश बनने की तैयारी में है।