नई दिल्ली : भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते के जो संयुक्त मसौदा और फैक्ट-शीट पहले चरण में वॉशिंगटन द्वारा प्रकाशित किए गए थे, उसमें बिना शुल्क अमेरिकी दाल और डिजिटल सर्विसेज के भारत में प्रवेश के उल्लेख को लेकर विपक्ष में खूब हंगामा मचा था।
लोकसभा में बजट बहस में भाग लेते हुए विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला किया। उनका दावा था कि भारत ने अमेरिकी सरकार डोनाल्ड ट्रंप के सामने सिर झुका दिया है और भारत माता को बेच दिया गया।
सचमुच उनके इस आरोप से कुछ घंटे पहले ही ट्रंप प्रशासन की ओर से मसौदा समझौते के फैक्ट-शीट का संशोधित संस्करण प्रकाशित किया गया था। इसमें राहुल और विपक्ष द्वारा उठाई गई कई आपत्तियों को हटा दिया गया था। इस कारण राहुल के आरोपों की धार कुछ कम हो गई।
लेकिन अमेरिकी दबाव में भारत के सिर झुकाने के मामले को क्या पूरी तरह केंद्र सरकार के दावे के अनुसार अफवाह कहा जा सकता है, इस पर फिर से सवाल उठ गया है।
गुरुवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जयसवाल ने कहा कि भारत ने रूस से तेल खरीद बंद करने को लेकर ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के दावे को सीधे तौर पर असत्य नहीं कहा। बल्कि उन्होंने सवाल का सीधा जवाब देने से बचते हुए जो कहा, उससे यह स्पष्ट हुआ कि फिलहाल नई दिल्ली व्हाइट हाउस को चिढ़ाना नहीं चाहती।
दाल और डिजिटल सर्विसेज को लेकर विवाद सुलझ गया, लेकिन एक बड़ा मुद्दा बचा। मसौदा समझौते में ट्रंप प्रशासन की ओर से स्पष्ट रूप से लिखा गया था कि भारत अमेरिकी मांग के अनुसार रूस से अप्राकृतिक तेल खरीदना बंद करेगा और इसी प्रतिज्ञा के बाद समझौता प्रभावी होगा।
वॉशिंगटन की ओर से नियमित अंतराल पर यह देखा जाएगा कि भारत सचमुच यह कर रहा है या नहीं। अगर भारत अपनी बात से पिछे हटता है, तो समझौता टूट सकता है।
बुधवार को यूएस हाउस सब-कॉमिटी (फॉरेन अफेयर्स ऑन यूएस टाइज विद साउथ एशिया) की एक सुनवाई में अमेरिकी असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ स्टेट पॉल कपूर ने कहा कि भारत सचमुच वही कर रहा है जो राष्ट्रपति ट्रंप चाहते थे, यानी रूस से तेल खरीदना बंद करना।
इससे अमेरिका के सामने यह सुनहरा मौका है कि रूस के तेल के खाली हो रहे बाजार में भारत में कुछ हिस्सेदारी हासिल कर सके।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जयसवाल ने यह भी कहा कि भारत में अमेरिकी राजदूत सर्गेई गोरोव और विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने इस पर गुरुवार को विस्तृत चर्चा की। यह विषय संसद में भी चर्चा का विषय रहो। इसलिए अब उन्हें इस पर और कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है।
केंद्रीय उद्योग और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी से भी गुरुवार को अलग-अलग सवाल किए गए। दोनों ने इसे विदेश मंत्रालय का मामला बताते हुए जवाब देने से खुद को बचा लिया।
हालांकि विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने फिर कहा कि भारत राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में ही अपने ऊर्जा स्रोत का चयन करेगा। लेकिन रूस से तेल खरीद बंद करने पर उन्होंने चुप्पी साधी है।