नई दिल्ली : अमेरिका द्वारा भारत पर टैरिफ घटाने और दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते के बाद भारत के बाजार में राहत लौट आई थी। खासकर वस्त्र उद्योग में निर्यात को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही थी। अमेरिका में वस्त्र निर्यात के मामले में भारतीय उत्पादों के प्रमुख प्रतिस्पर्धी बांग्लादेश के उत्पाद हैं। इसी परिदृश्य में अमेरिका ने बांग्लादेश के साथ व्यापार कर लिया। और इसकी वजह से भारतीय वस्त्र उद्योग में चिंता बढ़ गई। क्यों? क्या सच में यह अमेरिका-बांग्लादेश समझौता भारतीय वस्त्र उद्योग के लिए चिंता का विषय है?
कई रिपोर्टों के अनुसार बांग्लादेश के साथ अमेरिका द्वारा किया गया यह समझौता खास तौर पर बांग्लादेश के वस्त्र उत्पादन उद्योग के लिए लाभकारी होगा। सार्वजनिक रूप में हुए व्यापार समझौते में देखा गया है कि अमेरिका बांग्लादेश पर लगे 37 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 19 प्रतिशत कर देगा। यही कारण है कि बांग्लादेश के वस्त्र उद्योग चर्चा का केंद्र बन गया है, क्यों?
रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका ने कहा है कि वह बांग्लादेश के वस्त्र निर्यात पर शुल्क को शून्य तक लाने की रूपरेखा तैयार करेगा। ऐसा होने पर भारतीय वस्त्र निर्यातक अमेरिका के बाजार में तीव्र प्रतिस्पर्धा का सामना करेंगे। लेकिन बांग्लादेश को यह सुविधा पाने के लिए कड़े नियमों का पालन करना होगा।
क्या हैं वह शर्तें?
बांग्लादेश के कुछ वस्त्र और कपड़ों के निर्यात पर अमेरिका का रेसिप्रोकल टैरिफ तभी शून्य होगा जब बांग्लादेश अमेरिका में उत्पादित कपास या कृत्रिम सूत का उपयोग करके वस्त्र तैयार करेगा। बांग्लादेश में कितने और कौन से वस्त्रों पर अमेरिका शुल्क हटा देगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि बांग्लादेश अमेरिका से कितनी मात्रा में कपास और कृत्रिम सूत आयात कर रहा है।
इसके अलावा समझौते के अनुसार बांग्लादेश को अमेरिका के कई औद्योगिक और कृषि उत्पादों को अपने बाजार में प्रवेश देने में प्राथमिकता देनी होगी। इसमें उपकरण, कार के पुर्ज़े, स्वास्थ्य इन्फ्रास्ट्रक्चर के उपकरण, रसायन शामिल हैं। इसके अलावा डेयरी उत्पाद, सोयाबीन, पोल्ट्री उत्पाद भी इस सूची में हैं। साथ ही बांग्लादेश अमेरिका से बोइंग विमान खरीदेगा। इससे पहले ही बांग्लादेश ने अमेरिका से गेहूं खरीदने का समझौता किया हुआ है।