नई दिल्ली : आखिरकार भारतीय चाय बोर्ड (टी-बोर्ड) ने कड़े कदम उठाने का निर्णय लिया है। लंबे समय से यह शिकायत की जा रही थी कि भारत में अन्य देशों से निम्न गुणवत्ता वाली चाय आयात हो रही है। यह भी आरोप था कि आयातित चाय के मामले में भारत के फूड सेफ्टी मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। चाय उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि इस संबंध में लगातार चाय बोर्ड और केंद्र सरकार को अवगत करा रहे थे।
मंगलवार को टी-बोर्ड ने इस विषय में कड़ी निर्देशिका जारी की। निर्देशिका के अनुसार आगामी 1 मई से सभी प्रकार की आयातित चाय की जांच अनिवार्य रूप से की जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड्स एंड अथॉरिटी ऑफ इंडिया के नियमों का पालन हुआ है या नहीं। इसके साथ ही चाय बोर्ड के स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) का अनुपालन भी आवश्यक होगा। प्रत्येक सैंपल की प्रयोगशाला में जांच की जाएगी। सभी परीक्षणों में सफल होने के बाद ही अन्य देशों की चाय को भारतीय बाजार में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।
इस पूरी प्रक्रिया के संचालन और निगरानी के लिए टी-बोर्ड ने पांच अधिकारियों की नियुक्ति की है। चाय उत्पादकों के संगठन ‘सिस्टा’ के अध्यक्ष विजयगोपाल चक्रवर्ती ने इस निर्णय को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि अब तक केन्या, नेपाल, वियतनाम और चीन से निम्न गुणवत्ता वाली चाय बिना किसी बाधा के भारतीय बाजार में प्रवेश कर रही थी। इंडियन टी प्लांटर्स एसोसिएशन की डुआर्स शाखा के सचिव राम अवतार शर्मा ने भी इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यही अपेक्षित था।