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डिजिटल गिरफ्तारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा निर्देश

54 हजार करोड़ रुपये के डिजिटल फ्रॉड में, केंद्र को रिजर्व बैंक के SOP को तुरंत लागू करने का निर्देश।

By अन्वेषा बंद्योपाध्याय, Posted by : राखी मल्लिक

Feb 10, 2026 16:59 IST

नई दिल्ली : देश में अब तक जितने डिजिटल अरेस्ट के मामले सामने आए हैं या शिकायतें दर्ज हुई हैं, उनकी कुल राशि 54 हजार करोड़ रुपये है! इस आंकड़े का उल्लेख करते हुए देश की सर्वोच्च अदालत ने एक अवलोकन में कहा कि यह तो डकैती या छिनतई के अलावा और कुछ नहीं है।

इस दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायाधीश जयमलय बागची और न्यायाधीश एन वी आंजारिया की पीठ ने स्पष्ट कहा कि इस तरह के धन की लूट बैंक से जुड़े व्यक्तियों की मदद के बिना संभव नहीं है। डिजिटल फ्रॉड करने वाले लोग संबंधित बैंक के किसी न किसी व्यक्ति से बहुत निकटता से जुड़े होते हैं।

इसके बाद CJI सूर्यकांत ने कहा कि हम केंद्रीय गृह मंत्रालय को निर्देश दे रहे हैं कि बैंक के ग्राहकों की वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बहुत जल्दी सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ एक MOU समझौता ज्ञापन तैयार किया जाए। उस मसौदे को तैयार करने से पहले केंद्रीय मंत्रालय के प्रतिनिधि रिजर्व बैंक और अन्य बैंकों, टेलीकॉम विभाग के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने इस दिन बहुत कड़े शब्दों में कहा कि डिजिटल अरेस्ट के नाम पर जिस तरह आम जनता के बचत की 'डकैती' की जा रही है, उसे किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इस सवाल-जवाब के दौरान देश के अटॉर्नी जनरल और बैंकतरमानी ने कहा कि SOP 2 जनवरी को रिजर्व बैंक ने तैयार किया था। उसके बाद कई म्यूचुअल अकाउंट्स चिन्हित हुए। लेकिन उस SOP का पूर्ण कार्यान्वयन अब तक नहीं किया जा सका।

इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने तीव्र नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि ये बैंक धीरे-धीरे बोझ बनते जा रहे हैं। उन्हें याद रखना चाहिए कि वहां ग्राहकों का जो पैसा जमा है, वे उसके ट्रस्टी हैं। इसे देखकर इतना उत्तेजित होने की जरूरत नहीं है। और ग्राहकों के उस विश्वास को तोड़ना बिल्कुल भी सही नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि चार सप्ताह के भीतर समझौता ज्ञापन करना होगा। रिजर्व बैंक के SOP के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि साइबर क्राइम को रोकने के लिए अस्थायी रूप से बैंक धन को डेबिट या निकालने से रोक सकते हैं। हम केंद्रीय गृह मंत्रालय को निर्देश दे रहे हैं कि यह SOP अब पूरे देश में लागू किया जाए। इससे इंटर-एजेंसी समन्वय बेहतर होगा और साथ ही धोखेबाजों की स्थिति के बारे में भी जानकारी मिलेगी।

आगामी दो सप्ताह के भीतर संबंधित मंत्रालय को इस पर नियम बनाना होगा। पिछले साल अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने स्वयं डिजिटल अरेस्ट के माध्यम से वित्तीय धोखाधड़ी के मामले उठाए। दिसंबर में उन्होंने देश के सभी डिजिटल अरेस्ट मामलों को CBI के पास सौंप दिया। इस दिन बैंकतरमानी कोर्ट को बताते हैं कि अब तक 10 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी की पहचान की जा चुकी है।

CJI की पीठ ने CBI को निर्देश दिया कि डिजिटल अरेस्ट मामलों की तेजी से पहचान करे। साथ ही रिजर्व बैंक को भी संबंधित बैंकों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने का कड़ा निर्देश दिया। इसके साथ ही पीठ ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय को निर्धारित अंतराल पर देखना होगा कि सभी नियमों का पालन हो रहा है या नहीं।

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