नई दिल्ली : वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में भले ही अस्थायी स्थिरता लौट आई हो, लेकिन चांदी के बाजार में अस्थिरता बनी रहने का अनुमान विशेषज्ञों के एक वर्ग ने जताया है। चालू सप्ताह में अमेरिकी जीडीपी, पीएमआई और महंगाई से जुड़े आंकड़ों पर बुलियन मार्केट की भविष्य की दिशा निर्भर करेगी। इसके अलावा भारत, जर्मनी और चीन के आर्थिक आंकड़ों पर भी निवेशकों की कड़ी नजर है। फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के बयानों से अगर ब्याज दरों के भविष्य को लेकर संकेत मिलते हैं, तो बाजार की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
पिछले एक सप्ताह में एमसीएक्स में सोने का फ्यूचर प्राइस 5.2 प्रतिशत यानी 7698 रुपये बढ़ा है, जबकि चांदी करीब 6 प्रतिशत या 15,760 रुपये टूट गई है। वाशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव में कमी और ट्रंप प्रशासन की टैरिफ से जुड़ी बातचीत में प्रगति की वजह से निवेशक कुछ हद तक सतर्क रुख अपना रहे हैं।
हालांकि केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने की खरीद और ईटीएफ निवेश जारी रहने के कारण दीर्घकाल में सोने का भविष्य उज्ज्वल रहने की संभावना है, ऐसा अनुमान जेएम फाइनेंशियल और मोतीलाल ओसवाल जैसी संस्थाओं ने जताया है। विशेषज्ञों के अनुसार चांदी के मामले में जनवरी महीने के रिकॉर्ड स्तर से तेज सुधार देखा गया है। लूनर न्यू ईयर के मौके पर चीन में सोने की मांग बढ़ने से बाजार को कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि अल्पावधि में चांदी में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, लेकिन 2026 तक बुलियन मार्केट की समग्र प्रवृत्ति सकारात्मक रहने की संभावना अधिक है।