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अंतरिम व्यापार समझौता में पारस्परिक शुल्क घटा, कृषि-डेयरी को बड़ी राहत.. और क्या कह रहे हैं वाणिज्य मंत्री

इस समझौते से भारत को ही लाभ होने की उम्मीद कर रहे हैं वाणिज्य मंत्री।

By देवार्घ्य भट्टाचार्य, Posted by : राखी मल्लिक

Feb 07, 2026 15:57 IST

नई दिल्ली : भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर कुछ समय से चर्चा चल रही थी। शनिवार को इस व्यापार समझौते की सरकारी घोषणा केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने की। उन्होंने बताया कि भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत पारस्परिक शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके साथ ही अतिरिक्त जो 25 प्रतिशत कर लगाया गया था, वह भी हटा दिया गया है।

वाणिज्य मंत्री ने बताया कि अन्य देशों की तुलना में यह टैरिफ दर काफी कम है। उनका दावा है कि चीन के उत्पादों पर 35 प्रतिशत, वियतनाम और बांग्लादेश पर 20 प्रतिशत, और इंडोनेशिया पर 19 प्रतिशत टैरिफ है। ऐसे संदर्भ में भारत पर 18 प्रतिशत टैरिफ दर काफी कम मानी जाती है। इसके अलावा कई उत्पादों पर टैरिफ शून्य कर दिया गया है।

कौन-कौन से उत्पादों पर कोई कर नहीं लगाया गया?

मंत्री ने बताया कि भारत से कीमती रत्न, हीरे, मसाले, चाय, कॉफी, नारियल और नारियल तेल, काजू और विभिन्न फल और मसाले निर्यात करने पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा। हालांकि किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए कुछ क्षेत्रों को इस समझौते के बाहर रखा गया है।

पीयूष गोयल ने बताया कि जीन-परिवर्तित कॉर्प, मांस, पोल्ट्री और दुग्ध उत्पाद जैसे सोयाबीन, गेहूं, चीनी, बाजरा आदि पर कोई छूट नहीं दी गई है। इन उत्पादों पर 18 प्रतिशत कर लागू रहेगा। इसके अलावा केला, स्ट्रॉबेरी और चेरी जैसे कई फलों पर भी कोई कर छूट नहीं दी गई। स्मार्टफोन और फार्मास्यूटिकल्स पर भी कोई शुल्क नहीं लगाया जा रहा है।

मंत्री ने बताया कि ग्रीन पी, काबुली चना, मूंगदाल, तिलहन, अल्कोहल-मुक्त पेय, एथेनॉल सहित कई अन्य उत्पादों पर भी कोई छूट नहीं दी गई है। अमेरिका के साथ 500 बिलियन डॉलर का व्यापार होने वाला है। उनका दावा है कि इस व्यापार समझौते के माध्यम से देश के कृषि और डेयरी उद्योग में पर्याप्त सुधार होगा। पूरे देश की आर्थिक स्थिति में सुधार होने की संभावना है।

भविष्य में भी अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते पर चर्चा जारी रहेगी। वाणिज्य मंत्री का दावा है कि दोनों देशों के हितों की रक्षा करते हुए यह व्यापार समझौता चलता रहेगा। इस समझौते में भारत को अंततः लाभ होने की उम्मीद है।

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