नई दिल्ली : RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि रिजर्व बैंक UPI को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा। साथ ही UPI की तकनीकी व्यवस्था यानी इंफ्रास्ट्रक्चर को भी बेहतर किया जाएगा। उन्होंने यह बात 6 फरवरी को मुंबई में मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद कही।
गवर्नर ने बताया कि UPI भारत की एक बहुत ही खास और महत्वपूर्ण भुगतान व्यवस्था है। इसे न सिर्फ व्यवहार में रखना जरूरी है, बल्कि इसे और मजबूत और बेहतर बनाना भी जरूरी है। ऐसा करने से ग्राहकों से जुड़ी समस्याओं को भी कम किया जा सकेगा। अभी UPI का इस्तेमाल आम लोगों के लिए लगभग मुफ्त है। बैंक UPI लेनदेन करने के बदले सरकार से पैसा पाते हैं, क्योंकि डिजिटल भुगतान बढ़ने से देश में नकद पैसे का इस्तेमाल कम होता है।
कुछ समय से बैंक और भुगतान से जुड़े संस्थान चाहते हैं कि दुकानदारों से UPI लेनदेन पर थोड़ा शुल्क लिया जाए, जैसे क्रेडिट कार्ड पर लिया जाता है। उनका कहना है कि इससे UPI को आर्थिक रूप से चलाना आसान होगा। लेकिन सरकार ने अब तक इस मांग पर कोई विचार नहीं किया है, क्योंकि UPI का इस्तेमाल करीब 50 करोड़ लोग करते हैं और शुल्क लगाने से लोगों पर असर पड़ सकता है।
सरकार ने 2026–27 के बजट में छोटे मूल्य के UPI और RuPay डेबिट कार्ड लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए 2,000 करोड़ रुपये रखे हैं। यह पैसा बैंकों और भुगतान सेवा देने वाली कंपनियों को प्रोत्साहन के रूप में दिया जाता है। हालांकि यह राशि पिछले साल के मुकाबले थोड़ी कम है।
इससे पहले भी जुलाई 2025 में संजय मल्होत्रा ने कहा था कि UPI को आर्थिक रूप से मजबूत और व्यवहारिक बनाना जरूरी है। हाल ही में सरकार ने संसद को बताया कि इस वित्त वर्ष में दिसंबर तक UPI से लेनदेन का कुल मूल्य 230 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।