नई दिल्ली : ‘विकसित भारत’ के आर्थिक आधार को और मजबूत करने के लिए केंद्र बैंकिंग प्रणाली में मूलभूत सुधार की दिशा में कदम रखने जा रहा है। जल्द ही सरकार ने ‘विकसित भारत के लिए बैंकिंग’ शीर्षक से एक उच्चस्तरीय समिति बनाने का निर्णय लिया है। इस समिति का मुख्य कार्य देश की बैंकिंग प्रणाली को सुदृढ़ और बड़े स्वरूप में विकसित करने के लिए उपयुक्त रूपरेखा तैयार करना होगा, ताकि विकसित भारत की विशाल आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक इंटरव्यू में बताया कि विकसित भारत बनाने के लिए एक समिति बहुत जरूरी है। लोगों तक पर्याप्त ऋण, नकद और बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने में इस समिति की सिफारिशें अत्यंत महत्वपूर्ण होंगी।
वित्त मंत्री के अनुसार, “सरकार चाहती है कि समिति स्पष्ट रूप से बताए कि भविष्य की मांगों को पूरा करने के लिए बैंकिंग प्रणाली को कैसे तैयार किया जाना चाहिए।” उन्होंने यह भी बताया कि इसे केवल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के एकीकरण तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। लक्ष्य है पूरे बैंकिंग क्षेत्र को इतना विकसित करना कि विकसित भारत के आर्थिक गंतव्य तक पहुंचने के लिए आवश्यक पूंजी, ऋण और सेवाएं बिना किसी बाधा के उपलब्ध हों। विकसित भारत का अर्थ केवल उन्नत अवसंरचना नहीं है, बल्कि इसके लिए विशाल धन की आपूर्ति और उस धन को पहुंचाने में सक्षम बैंकिंग प्रणाली भी जरूरी है।
समिति के गठन की समय सीमा के बारे में निर्मला ने कहा कि यह प्रक्रिया यथासंभव जल्द शुरू की जाएगी। उल्लेखनीय है कि 1 फरवरी को प्रस्तुत बजट भाषण में भी उन्होंने इस उच्चस्तरीय समिति के गठन का प्रस्ताव रखा था।
बजट में देश की सार्वजनिक गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं को लेकर भी एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया गया है। दक्षता बढ़ाने और आकार में बड़ा करने के पहले चरण के रूप में पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन के पुनर्गठन की बात कही गई है। इस संबंध में वित्त मंत्री ने बताया कि संबंधित मंत्रालय पहले ही कई काम कर चुका है और यह प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी, यह समय बताएगा।